लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2025-26 को समाप्त होने में अब एक सप्ताह से भी कम का समय बचा है, लेकिन सरकारी आंकड़ों ने शासन की चिंता बढ़ा दी है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के सभी विभाग मिलकर अब तक कुल बजट का मात्र 60 प्रतिशत ही खर्च कर पाए हैं। यानी सरकारी खज़ाने में अब भी 40 फीसदी बजट (लगभग 3.46 लाख करोड़ रुपये) बिना इस्तेमाल के पड़ा है, जिसे 31 मार्च तक खर्च करना नामुमकिन नजर आ रहा है।
8.65 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट और सुस्त रफ़्तार
योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 8.08 लाख करोड़ का मूल बजट पेश किया था, जो अनुपूरक बजट के बाद बढ़कर 8.65 लाख करोड़ रुपये हो गया था। मार्च के अंत तक सभी विभागों का कुल खर्च लगभग 5.19 लाख करोड़ तक ही पहुँच सका है।
सूत्रों के मुताबिक, हालिया कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट इस्तेमाल में बरती जा रही इस ढिलाई पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का पैसा विभागों की फाइलों में ही दबा रह गया है।
छुट्टियों का गणित: खर्च के लिए ‘वर्किंग डेज’ की कमी
कहने को तो 31 मार्च तक 6 दिन शेष हैं, लेकिन वास्तविक कार्यदिवस (Working Days) बेहद कम हैं जिसमे गुरुवार और शुक्रवार (आज और कल) को रामनवमी का सार्वजनिक अवकाश रहेगा । शनिवार को जिलों में दफ्तर खुलेंगे, लेकिन शासन और बैंकों में छुट्टी रहेगी इसी के साथ 31 मार्च को महावीर जयंती का अवकाश रहेगा।
ऐसे में विभागों के पास कागजी कार्रवाई और भुगतान (Payments) के लिए समय बहुत सीमित है।
इन विभागों का प्रदर्शन सबसे खराब (50% से कम खर्च)
चौंकाने वाली बात यह है कि विकास से जुड़े कई बड़े विभागों ने अपनी प्रावधानित राशि का आधा हिस्सा भी खर्च नहीं किया है। इनमें सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD), नगर विकास और ग्राम्य विकास, जनजाति कल्याण और समाज कल्याण विभाग, संस्कृति, परिवहन, न्याय, कारागार, मत्स्य और भारी उद्योग विभाग प्रमुख हैं ।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बजट समय पर खर्च नहीं हुआ, तो बड़ी राशि ‘लैप्स’ होकर सरकारी खजाने में वापस चली जाएगी, जिससे कई विकास परियोजनाएं अधूरी रह सकती हैं।

