इस बार BJP को न चंदा मिलने जा रहा… और न ही वोट, ​चुनाव की चुनौती के लिए तैयार सपा: अखिलेश यादव

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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। एक प्रेस वार्ता और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली से लेकर राम मंदिर में चढ़ावे और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

​’भाजपा को अब चंदा और वोट नहीं मिलेगा’

अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस बार भारतीय जनता पार्टी को न तो चंदा मिलने जा रहा है, न दान, न चढ़ावा और न ही जनता का वोट। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ने संविधान, आस्था, मर्यादा और श्रद्धा के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़ी चर्चाओं को गंभीर बताते हुए कहा कि इसकी सच्चाई जैसे-जैसे बाहर आएगी, भाजपा का चेहरा जनता के सामने और अधिक बेनकाब होगा। यादव ने कहा, “मर्यादा का पहला नाम प्रभु श्री राम और दूसरा नाम संविधान है। इन लोगों ने भगवान राम को भी दगा दिया है।”

​’थाने चला रही है भाजपा’

भाजपा सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में न्याय मिलना नामुमकिन हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से भाजपा के इशारों पर काम कर रहा है। उन्होंने भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जनता ने प्रदेश में इतना भ्रष्टाचार पहले कभी नहीं देखा होगा। उन्होंने ‘हथेली गर्म, पुलिस नर्म’ का मुहावरा इस्तेमाल करते हुए कहा कि भाजपा के शासन में व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

​बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर सवाल

भाजपा की विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का उदाहरण दिया। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री के उद्घाटन के अगले ही दिन एक्सप्रेस-वे का एक हिस्सा ढह गया था, जिससे यह साबित होता है कि भाजपा सरकार निर्माण कार्य की गुणवत्ता (Quality) से समझौता करती है।

​चुनाव की चुनौती के लिए तैयार सपा

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारियों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि जो लोग चुनाव नवंबर में कराने की सोच रहे थे, वे सितंबर में ही करवा लें; समाजवादी पार्टी हर स्थिति में तैयार है। यादव ने कहा कि जनता बेसब्री से इंतजार कर रही है कि कब अपने वोट की ताकत से इस सरकार को सत्ता से बाहर करे।

​अखिलेश यादव के इस आक्रामक रुख ने प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है, जहाँ एक ओर सपा अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश में है, वहीं भाजपा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विपक्ष लगातार दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।