इस दीवाली ताजमहल की पच्चीकारी से जगमगाएंगे घर; आगरा के संगमरमर से तराशे गए खूबसूरत दीयों की देश-विदेश में बढ़ी डिमांड

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आगरा। दीपावली के पावन पर्व पर ताजनगरी आगरा के बाजारों में उत्सव की भव्य रौनक छाई हुई है। लोग अपने आशियानों को रोशन करने के लिए विभिन्न प्रकार की आकर्षक सामग्रियों की खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन इस बार बाजार में कुछ ऐसा खास पहुंच रहा है जो हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

इस दीवाली घरों को रोशन करने वाले ये दीये आम मिट्टी या पीतल के नहीं, बल्कि शुद्ध सफेद संगमरमर (मार्बल) से तैयार किए गए हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन पर दुनिया भर में मशहूर ताजमहल जैसी बेमिसाल पच्चीकारी (Inlay Work) की गई है, जिसकी खूबसूरती देश ही नहीं बल्कि विदेशों में बैठे लोगों का भी मन मोह रही है।

​संगमरमर की तराश और रंग-बिरंगे पत्थरों का अनूठा मेल

सफेद संगमरमर से बने ताजमहल की अद्वितीय सुंदरता और उस पर उकेरे गए रंग-बिरंगे पत्थरों का जादू पूरी दुनिया में सिर चढ़कर बोलता है। अब आगरा के कुशल कारीगरों ने इसी ऐतिहासिक और पारंपरिक मुगलकालीन कला को दीयों के छोटे मगर बेहद कलात्मक स्वरूप में ढाल दिया है। इस दीवाली इन संगमरमर के दीयों ने बाजार में अपनी एक बिल्कुल अलग और विशिष्ट पहचान बनाई है।

​शुद्ध सफेद संगमरमर को तराशकर बनाए गए इन दीयों पर हरे, लाल और अन्य रंगों के कीमती पत्थरों से बेहद बारीक और नफीस पच्चीकारी की गई है। इनकी चमक और कलात्मक फिनिशिंग इतनी आकर्षक है कि देखने वाले मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। इन दीयों की बारीकी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक सिंगल दीये को पूरी तरह तैयार करने में कारीगरों को करीब 4 से 5 दिन का कड़ा परिश्रम करना पड़ता है।

​विदेशों तक पहुंची ताजनगरी की इस कला की गूंज

​इन दीयों के निर्माण में सफेद संगमरमर के साथ-साथ विशेष तौर पर विदेशों से आयात किए गए विभिन्न रंगों के प्राकृतिक पत्थरों का उपयोग किया जाता है। आगरा के स्थानीय कारखानों और पच्चीकारी इकाइयों में तैयार हो रहे इन दीयों की मांग अब केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के महानगरों के साथ-साथ विदेशों में रह रहे भारतीय (NRI) परिवारों के बीच भी तेजी से बढ़ रही है।

लोग ऑनलाइन माध्यमों और फोन कॉल के जरिए सीधे संपर्क कर इन विशेष दीयों को अपने घरों के लिए बुक करवा रहे हैं। इस खरीदारी के पीछे का मकसद केवल घर को रोशनी से भरना भर नहीं है, बल्कि दीवाली के इस पावन पर्व पर ताजमहल की ऐतिहासिक पहचान और आगरा की सदियों पुरानी हस्तकला को अपने घर का हिस्सा बनाना भी है।

अदनान शेख ने बताया, विदेशों में भी बढ़ रही मांग

फैक्ट्री मालिक अदनान शेख ने बताया कि आगरा की संगमरमर पर पच्चीकारी की कला को दीपावली के अवसर पर एक नया स्वरूप देने का प्रयास किया गया है। ताजमहल की पहचान बन चुकी इस पारंपरिक कला को जब संगमरमर के दीयों पर उकेरा गया तो लोगों ने इसे काफी पसंद किया। उन्होंने कहा कि इन दीयों को तैयार करने में कारीगरों की कई दिनों की मेहनत और बारीक कारीगरी शामिल होती है। यही वजह है कि प्रत्येक दीया अपने आप में एक खास कलाकृति है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ देश के अन्य शहरों और विदेशों में रहने वाले भारतीय परिवार भी इन दीयों में रुचि दिखा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि आगरा की इस ऐतिहासिक हस्तकला को नई पहचान मिले और यहां के कारीगरों को भी रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हों।