मुंबई (अनिल बेदाग): भारत के समुद्री और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। मुंबई की हलचल भरी कारोबारी फिज़ा में जर्मनी की दिग्गज वैश्विक शिपिंग कंपनी हैपाग-लॉयड (Hapag-Lloyd) और भारत सरकार के बीच एक ऐसा ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जो भविष्य में देश की समुद्री शक्ति की दिशा और दशा बदल सकता है। यह सहमति पत्र (MoU) केवल एक औपचारिक करार नहीं है, बल्कि वैश्विक समुद्री सहयोग के एक नए युग का प्रवेश द्वार है।
इस रणनीतिक साझेदारी का दायरा काफी व्यापक है। इसके तहत भारतीय ध्वज के साथ जहाजों की रीफ्लैगिंग (Reflagging), एक टिकाऊ और सुरक्षित शिप रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम का निर्माण, और वाधवान पोर्ट जैसे भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में बड़े निवेश की योजना शामिल है। ये पहल न केवल भारत की समुद्री क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करेंगी, बल्कि देश को ग्लोबल सप्लाई चेन के एक अनिवार्य केंद्र (Hub) के रूप में भी स्थापित करेंगी।
हैपाग-लॉयड के सीईओ रोल्फ हैब्बेन जैनसेन के साथ हुई इस उच्च-स्तरीय मुलाकात ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब महज़ एक उभरता हुआ बाज़ार नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार का एक अटूट स्तंभ बनने की राह पर है।
इस साझेदारी पर उत्साह व्यक्त करते हुए हैंसीटिक ग्लोबल टर्मिनल्स के सीईओ और हैपाग-लॉयड के कार्यकारी बोर्ड के सदस्य धीरज भाटिया ने कहा, “भारत का पोर्ट और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर आज जिस गति और पैमाने से विकसित हो रहा है, वह वाकई काबिले-तारीफ है।
वाधवान पोर्ट जैसी मेगा परियोजनाओं में भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का पावरहाउस बनाने की पूरी क्षमता है। हम भारत के लिए एक कुशल और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में अपना योगदान देने के लिए पूरी तरह उत्सुक हैं।”

