सियोल में गूँजेगा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश; वर्ल्ड मेडिटेशन फोरम में मुख्य वक्ता होंगे शिवकृपानंद स्वामीजी

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मुंबई (अनिल बेदाग): भारत की ऋषियों वाली प्राचीन आध्यात्मिक विरासत एक बार फिर वैश्विक पटल पर जगमगा उठी है। हिमालयन समर्पण ध्यानयोग के संस्थापक पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी को ‘वर्ल्ड मेडिटेशन एक्सपर्ट कमेटी’ में शामिल किया जाना न केवल भारत के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि यह विश्व स्तर पर भारतीय ध्यान-साधना की बढ़ती स्वीकार्यता का जीवंत प्रमाण भी है।

​सियोल (दक्षिण कोरिया) में गूँजेगा भारतीय अध्यात्म का स्वर

दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में 25-26 मार्च 2026 को आयोजित होने वाले द्वितीय ‘वर्ल्ड मेडिटेशन डे’ फोरम में स्वामीजी को विशिष्ट वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय मंच दुनिया भर के प्रख्यात ध्यानगुरुओं, वैज्ञानिकों और विचारकों को एक साथ लाकर वर्तमान की मानसिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान तलाशने का प्रयास करता है।

​तीन दशकों की साधना और 72 देशों का विस्तार

स्वामीजी ने हिमालय की कंदराओं में वर्षों की कठोर साधना से जो आत्मज्ञान अर्जित किया, उसे वे पिछले तीन दशकों से निस्वार्थ भाव से समाज को समर्पित कर रहे हैं। आज विश्व के 72 देशों में फैले लाखों साधक उनके मार्गदर्शन में ‘समर्पण ध्यान’ के माध्यम से आंतरिक शांति और जीवन में संतुलन प्राप्त कर रहे हैं।

​स्वामीजी का मूल मंत्र ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) आज के अशांत और विभाजित विश्व में एकता और करुणा का मार्ग प्रशस्त करता है। उनकी यह नई वैश्विक भूमिका भारत को ‘विश्व गुरु’ और आध्यात्मिक नेतृत्व के केंद्र के रूप में और भी मजबूती से स्थापित करती है।