आगरा। कॉर्पोरेट जगत में सही निर्णय और लंबी रेस का घोड़ा बनने के लिए वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) को अनिवार्य बताते हुए विशेषज्ञों ने योग्य सलाहकारों की भूमिका को निर्णायक बताया है। नेहरू नगर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) के आगरा चैप्टर कार्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में ‘कॉर्पोरेट निवेश और वित्तीय समझ’ विषय पर गहन मंथन किया गया।
पौराणिक उदाहरण: जब विभीषण ने छोड़ी लंका…
कार्यशाला के मुख्य वक्ता सीएस बसंत कुमार चतुर्वेदी ने वित्तीय साक्षरता को आध्यात्मिक और तार्किक दृष्टिकोण से जोड़कर पेश किया। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा, “जब रावण के प्रमुख सलाहकार विभीषण ने लंका छोड़ी, तभी से लंका के विनाश की पटकथा लिख दी गई थी।”
उन्होंने समझाया कि ठीक इसी तरह, किसी भी कंपनी या संगठन में एक सक्षम कंसल्टेंट या कंपनी सेक्रेटरी वह ‘विभीषण’ (सत्य का सलाहकार) होता है, जो संस्थान को संभावित जोखिमों से बचाकर सफलता की राह दिखाता है।
केवल निवेश नहीं, सही निर्णय है वित्तीय साक्षरता
चतुर्वेदी ने जोर देकर कहा कि वित्तीय साक्षरता केवल बैलेंस शीट या निवेश की तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति और संस्था के भीतर सही समय पर सटीक निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है। यदि कंपनियां वित्तीय रूप से अनुशासित और जागरूक हों, तो वे बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भी स्थिरता और सतत विकास (Sustainable Growth) प्राप्त कर सकती हैं।
जोखिम प्रबंधन पर विशेषज्ञों की राय
कार्यशाला के दौरान कॉर्पोरेट निवेश, रिस्क मैनेजमेंट और वित्तीय अनुशासन जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सवाल पूछे और जाना कि कैसे एक छोटी सी वित्तीय चूक किसी बड़े संगठन की नींव हिला सकती है।
गरिमामयी उपस्थिति
इस ज्ञानवर्धक सत्र में सीएस अनुप्रिया गोयल, सीएस तुलिका बंसल और सीएस नीतू अग्रवाल सहित शहर के कई दिग्गज कंपनी सेक्रेटरी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में आगरा चैप्टर के चेयरमैन सीएस अनुज अशोक अग्रवाल ने मुख्य वक्ता बसंत कुमार चतुर्वेदी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और भविष्य में भी ऐसी कार्यशालाओं के आयोजन की प्रतिबद्धता दोहराई।

