नई दिल्ली/आगरा। देश की राजधानी दिल्ली से ताजनगरी आगरा के बीच की दूरी भविष्य में केवल 59 मिनट में पूरी की जा सकेगी। केंद्र सरकार ने देश के महत्वाकांक्षी प्रस्तावित हाईस्पीड रेल नेटवर्क के ‘नॉर्दर्न कॉरिडोर’ को अपनी हरी झंडी दे दी है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान इसकी आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह नया हाईस्पीड कॉरिडोर दिल्ली से आरंभ होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या के रास्ते वाराणसी, पटना, सिलीगुड़ी और गुवाहाटी तक विस्तारित होगा। इस वृहद परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तर भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के प्रमुख महानगरों व शहरों को हाईस्पीड रेल मार्ग से आपस में जोड़ना है।
दिल्ली से आगरा पहुंचेगा महज 59 मिनट में
इस प्रस्तावित हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पर विभिन्न महानगरों और शहरों के बीच आवागमन का संभावित समय भी तय कर दिया गया है। इसके मुताबिक, दिल्ली से आगरा की दूरी तय करने में 59 मिनट, कानपुर पहुँचने में 1 घंटा 45 मिनट तथा राजधानी लखनऊ पहुँचने में मात्र 2 घंटे 12 मिनट का समय लगेगा। इसी तरह, वाराणसी से प्रयागराज का सफर 33 मिनट, लखनऊ का सफर 1 घंटा 21 मिनट और पटना की दूरी मात्र 1 घंटे में तय की जा सकेगी। इसके अलावा, वाराणसी से दिल्ली की संपूर्ण यात्रा 3 घंटे 33 मिनट तथा आगरा की यात्रा 2 घंटे 34 मिनट में पूरी होने की संभावना जताई गई है।
आगरा के पर्यटन और औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार
इस हाईस्पीड रेल नेटवर्क के धरातल पर उतरने से आगरा की कनेक्टिविटी दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश के अन्य बड़े शहरों के साथ और अधिक सुदृढ़ हो जाएगी। इसका सीधा और व्यापक लाभ ताजनगरी के पर्यटन, व्यावसायिक गतिविधियों, उद्योगों और नए निवेश को प्राप्त होगा। विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारकों और ताजमहल का दीदार करने देश-विदेश से आगरा आने वाले पर्यटकों को आवागमन का एक अति तीव्र और आधुनिक विकल्प मिल सकेगा। बेहतर रेल संपर्कों के विकसित होने से आगरा में व्यापारिक अवसरों और रोजगार के नए आयाम खुलने की प्रबल संभावनाएं बनेंगी।
रेल मंत्री के अनुसार, इस पूरी परियोजना को देश की महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ अवधारणा के अनुरूप ही विकसित किया जाएगा। इसमें देश के स्वदेशी इंजीनियरों, कुशल तकनीशियनों और श्रमिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जाएगा।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के पश्चात अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), कुल निर्माण लागत, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया, तथा निर्माण कार्य के प्रारंभ होने व उसके पूरा होने की निश्चित समयसीमा जैसे कई तकनीकी पहलुओं का आधिकारिक रूप से सामने आना अभी बाकी है।

