आख़िर ये कैसे जानेंगे दर्द: सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ते राजनेताओं के बच्चे

जब तक विधायक, मंत्री और अफसरों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते रहेंगे, तब तक सरकारी स्कूलों की हालत नहीं सुधरेगी। अनुभव से नीति बनती है, और सत्ता के पास उस अनुभव का अभाव है। स्कूलों में छत गिरने से मासूमों की मौत, किताबों की कमी, अधूरे शौचालय — ये सब आम जनता के हिस्से […]

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संवेदना का नया वैश्विक रूप, जिसमें भावना नहीं, ‘कूलनेस’ बिकती है…

हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ लोग अपनी मां को वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं, लेकिन कुत्तों के लिए मखमली बिस्तर खरीदते हैं। जहाँ बच्चे की फीस चुकाना कठिन होता है, पर पालतू जानवर के लिए सालगिरह पार्टी देना ‘प्यारा’ माना जाता है। यह वह युग है जहाँ संवेदना की दिशा बदली है, […]

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अख़बारों में साहित्य की हत्या और शब्दकर्मियों की बेइज़्ज़ती

आज के अधिकांश अख़बारों से साहित्यिक पन्ने या तो पूरी तरह गायब हो चुके हैं या केवल खानापूरी तक सीमित हैं। लेखकों को छापकर उन्हें ‘कृपा’ का अनुभव कराया जाता है, परंतु सम्मानजनक मानदेय नहीं दिया जाता। अब कुछ मालिकान पुरस्कार योजनाएं बनाकर लेखक-सम्मान का दिखावा कर रहे हैं, जबकि बुनियादी ज़रूरत है — श्रम […]

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धर्मांतरण का धंधा: विदेशी फंडिंग और सामाजिक विघटन का षड्यंत्र

उत्तर प्रदेश में एटीएस ने एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का खुलासा किया है, जिसमें विदेशी फंडिंग के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये 40 खातों में भेजे गए। मुख्य आरोपी ‘छांगरू बाबा’ उर्फ जमशेदुद्दीन के नेतृत्व में यह गिरोह ऊंची जाति की लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपये की दर से धर्मांतरण कराता था। यह मामला […]

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ई-वोटिंग: लोकतंत्र की मजबूती या तकनीकी जटिलता?

ई-वोटिंग मतदान प्रक्रिया को सरल, सुलभ और व्यापक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है। बिहार के प्रयोग से स्पष्ट है कि मोबाइल ऐप के माध्यम से मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी संभव है। हालांकि, तकनीकी पहुंच, साइबर सुरक्षा, मतदाता की पहचान और गोपनीयता जैसी चुनौतियाँ इस प्रणाली के समक्ष खड़ी हैं। डिजिटल […]

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“कुकुरमुत्तों की तरह उगते कोचिंग सेंटर: CET या लूट की नई राह?”

“CET के नाम पर कोचिंग माफिया: हरियाणा में शिक्षा का बढ़ता सौदा” “CET का चक्रव्यूह और कोचिंग का जाल हरियाणा में CET परीक्षा लागू होने के बाद जिस रफ्तार से कोचिंग सेंटर गली–गली उग आए हैं, वह न केवल शिक्षा के व्यवसायीकरण का प्रमाण है, बल्कि बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का क्रूर दोहन भी है। […]

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ज़ीरो डोज़ बच्चे: टीकाकरण में छूटे हुए भारत की तस्वीर

भारत में 2023 में 1.44 मिलियन बच्चे ‘ज़ीरो डोज़’ श्रेणी में थे, जिनमें अधिकांश गरीब, अशिक्षित, जनजातीय, मुस्लिम और प्रवासी समुदायों से आते हैं। भूगोलिक अवरोध, सामाजिक हिचकिचाहट, शहरी झुग्गियों में अव्यवस्थित शासन और निगरानी की कमी प्रमुख चुनौतियाँ हैं। मिशन इंद्रधनुष जैसी योजनाएँ सीमित प्रभावी रही हैं। समाधान के लिए समुदाय-आधारित सहभागिता, तकनीक आधारित […]

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जल की बूंद-बूंद पर संकट: नीतियों के बावजूद क्यों प्यासी है भारत की धरती?

भारत दुनिया की 18% आबादी और मात्र 4% ताजे जल संसाधनों के साथ गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। भूजल का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, असंतुलित खेती, और जलवायु परिवर्तन इसके प्रमुख कारण हैं। सरकारी योजनाओं और नीतियों के बावजूद कार्यान्वयन और जनभागीदारी की कमी से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। जल संरक्षण को […]

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किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता सोशल मीडिया

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाएगी। वास्तव में पूरी दुनिया में किशोरों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर आयु प्रतिबंध लगाने के संभावित लाभ और नुकसान, साथ ही संभावित अनपेक्षित परिणामों […]

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सार्क की चुनौतियों का समाधान कैसे कर सकता है भारत ?

भारत अलग-अलग सार्क सदस्यों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर सकता है जिससे अधिक बहुपक्षीय सफलता मिल सकती है। कनेक्टिविटी और व्यापार पर बांग्लादेश के साथ भारत के हालिया प्रयासों ने सार्क की सीमित प्रगति के बावजूद द्विपक्षीय सहयोग में सुधार किया है। भारत […]

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