अस्पताल से जिन्दा कैसे लौटे? बीमारी से बड़ी बन चुकी है इलाज की लूट

आज अस्पताल जीवनदान से ज़्यादा भय और लूट का केंद्र बन गए हैं। नॉर्मल केस को वेंटिलेटर तक पहुँचाना, अनावश्यक टेस्ट कराना और दवा कंपनियों से कमीशन लेना आम हो गया है। मरीज और परिजन मानसिक, आर्थिक और शारीरिक कष्ट झेलते हैं। डॉक्टरों की छवि भगवान से कसाई जैसी होती जा रही है। समाधान यही […]

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परंपरा से प्रौद्योगिकी की ओर: प्राचीन ज्ञान और भविष्य की तकनीक का सेतु है संस्कृत

संस्कृत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना है। इसकी वैज्ञानिक व्याकरणिक संरचना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डिजिटल तकनीकों के लिए आदर्श है। संस्कृत का पुनर्जीवन भारत को ज्ञान और तकनीक की दिशा में विश्व का नेतृत्वकर्ता बना सकता है। यह भाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिकता के साथ […]

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सोचिए! आप किसे फॉलो कर रहे हैं…लोकप्रियता नहीं, आदर्श ही जीवन की दिशा तय करते हैं

फॉलो करना केवल सोशल मीडिया पर बटन दबाना नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन की दिशा तय करता है। करोड़ों लोग किसी को फॉलो करें, इसका अर्थ यह नहीं कि वह सच्चा आदर्श है। पान–गुटखा बेचने वाला खुद गुटखा नहीं खाता, यही दिखावे और सच्चाई का अंतर है। असली प्रेरणा हमें शहीदों, महापुरुषों और भारतीय […]

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मनीषा हत्याकांड: हरियाणा पुलिस की लापरवाही और समाज की बेपरवाही ने छीनी एक और बेटी की जान

“मनीषा की हत्या ने हरियाणा की पुलिस और शासन व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्राथमिकी दर्ज करने में देरी, चित्रण देर से लेना और परिजनों की गुहार को नज़रअंदाज़ करना – ये सब पुलिस की लापरवाही के प्रमाण हैं। परिवार का शव न लेने का फैसला एक प्रतीक है कि अब जनता […]

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टैबलेट या सरकारी खिलौने? तकनीकी शिक्षा का बड़ा धोखा

हरियाणा सरकार ने कोविड काल में 700 करोड़ रुपये खर्च कर 5 लाख छात्रों को टैबलेट बांटे थे, जिनका उद्देश्य डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना था। परंतु तीन साल बाद इन टैबलेट्स में न तो सिम कार्ड हैं, न इंटरनेट की सुविधा, और न ही इनसे पढ़ाई हो रही है। इनमें 2025-26 तक का सिलेबस […]

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रक्षाबंधन: क्या वास्तव में निभा रहे हैं भाई-बहन प्रेम और रक्षा का वादा?

रक्षाबंधन केवल राखी बांधने और गिफ्ट देने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और परस्पर सहयोग का प्रतीक है। आज यह पर्व सोशल मीडिया दिखावे और औपचारिकताओं में सिमटता जा रहा है। भाई-बहन सालभर दूर रहते हैं, पर एक दिन फोटो खिंचाकर ‘रिश्ता निभाने’ का प्रमाण दे देते हैं। असली रक्षा तब है […]

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लव जिहाद: न्यायालय की चेतावनी और समाज का आईना

“लव जिहाद” — एक ऐसा शब्द जो न तो भारतीय क़ानून में परिभाषित है, न संविधान में मान्यता प्राप्त, लेकिन फिर भी राजनीतिक मंचों, टीवी डिबेट्स और सड़कों पर सुनाई देने लगा है। अब यह बहस हरियाणा तक भी पहुँच चुकी है, और अदालतों तक भी। हाल ही में हरियाणा के एक चर्चित केस में […]

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महाराजा संपादक: जब बंद हो जाए चौपाल और लगने लगे दरबार…फिर किसके लिए हैं अखबार?

जब लोकतंत्र का प्रहरी—संपादक—जनता से संवाद बंद कर दे और सत्ता का दरबारी बन जाए, तब पत्रकारिता दम तोड़ने लगती है। आज बड़े संपादक आम आदमी से कट चुके हैं, गाँव-कस्बों की आवाज़ें अखबारों में गुम हैं। संवाद की जगह प्रचार ने ले ली है। सत्ता और पूँजी के एजेंडे चलाए जा रहे हैं। अब […]

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चाइनीज मांझा: कार्यवाई का शोर और खुलेआम बिकती मौत की डोर

चाइनीज मांझा, जो नायलॉन और धातु से बना अत्यंत तीव्र धार वाला धागा है, आज पतंगबाज़ी से कहीं अधिक जानलेवा साबित हो रहा है। यह मांझा इंसानों और पक्षियों दोनों के लिए खतरनाक है, जिससे हर वर्ष कई दुर्घटनाएं होती हैं। गर्दन और चेहरे पर गहरे कट, पक्षियों की मृत्यु, और सड़क हादसों की वजह […]

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एक बार विधायक, उम्रभर ऐश: 5 साल की कुर्सी बनाम 60 साल की नौकरी… पेंशन का पक्षपात

एक कर्मचारी 60 साल काम करने के बाद भी पेंशन के लिए तरसता है, जबकि एक नेता 5 साल सत्ता में रहकर जीवनभर पेंशन पाता है। यह लोकतांत्रिक समानता के मूल्यों का मज़ाक है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई गई है। अब वक्त है कि आम नागरिक, कर्मचारी […]

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