राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर स्वामी प्रसाद मौर्य का तीखा हमला: बोले- क्या सिर्फ प्यादे पिटेंगे या बादशाहों पर भी ….

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लखनऊ। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। इस प्रकरण में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद, विपक्ष का आरोप है कि इस पूरे कांड के असली ‘सूत्रधारों’ को बचाया जा रहा है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के प्रमुख और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने सरकार पर सीधा प्रहार किया है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से सरकार की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एवं अनिल मिश्रा को विश्व हिंदू परिषद मुख्यालय से जारी फरमान के तहत इस्तीफा देकर मुख्यालय पहुंच जाने से क्या करोड़ों-अरबों की चोरी व हेरा-फेरी के आरोपों से बच जाएंगे? क्या कानून का हाथ भी उनके गिरेबान तक पहुंचेगा?”

मौर्य ने आगे तंज कसते हुए कहा कि अब उत्तर प्रदेश सरकार के ‘कानून के राज’ की असली परीक्षा का समय है कि इस मामले में केवल छोटे ‘प्यादे’ ही पिटेंगे या फिर असली ‘बादशाहों’ पर भी कार्रवाई होगी।

​बड़े चेहरों को बचाने का आरोप

ज्ञात हो कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया था, जिनकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है। हालांकि, विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि इस घटना की आड़ में बड़े पदों पर बैठे लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। विशेष रूप से चंपत राय और ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ सदस्यों की भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया

उधर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस्तीफों की पुष्टि की है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्ददेव गिरि ने कहा कि मंदिर में हुई हालिया घटनाओं से वे अत्यंत दुखी और आहत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यास इसकी पूरी तरह न्यायपूर्ण जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

कोषाध्यक्ष ने बताया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के त्यागपत्र उन्हें प्राप्त हो गए हैं, जिस पर न्यास की आगामी बैठक में विचार किया जाएगा। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार और ट्रस्ट दोनों पर ही मामले को तार्किक अंजाम तक पहुँचाने का भारी दबाव है।