रक्षाबंधन पर स्वदेशी राखियों की धूम: ‘विकसित भारत’ और ‘मोदी गारंटी’ थीम वाली राखियां बनीं लोगों की पहली पसंद, रोहित कत्याल बोले—स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प को मिल रहा बड़ा बाजार

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नई दिल्ली/आगरा: इस वर्ष रक्षाबंधन का पावन पर्व केवल भाई-बहन के पवित्र और अटूट प्रेम का ही प्रतीक नहीं बन रहा है, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’, स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ते भारी जन-विश्वास और राष्ट्रीय गौरव का एक बहुत बड़ा उत्सव भी बन चुका है। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा हाल ही में 12 अगस्त से 15 अगस्त तक नई दिल्ली के ऐतिहासिक भारत मंडपम में आयोजित ‘भारतीय व्यापार महोत्सव’ की अपार सफलता ने देश भर के स्वदेशी उत्पादों को एक विशाल और नया बाजार उपलब्ध कराया है, जिसका सीधा सकारात्मक असर इस त्योहारी सीजन में देखने को मिल रहा है। देश के तमाम बाजारों में स्वदेशी राखियों की जबरदस्त मांग बनी हुई है और विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व आधुनिक अंदाज में तैयार की गई विशिष्ट भारतीय राखियां उपभोक्ताओं का विशेष केंद्र बनी हुई हैं।

कैट के उत्तर प्रदेश सह-संयोजक एवं आगरा जिला अध्यक्ष रोहित कत्याल ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस वर्ष रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर देशभर में लगभग ₹25 हजार करोड़ के कुल व्यापार का अनुमान लगाया जा रहा है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में करीब 45 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, यदि इसमें उपहारों, मिठाइयों, वस्त्रों और अन्य त्योहारी सामग्रियों के कारोबार को भी जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा ₹30 हजार करोड़ से भी काफी आगे निकल सकता है। पिछले वर्ष देश भर में राखी का कुल व्यापार लगभग ₹17 हजार करोड़ का हुआ था, जबकि वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 12 हजार करोड़ रुपये के आसपास सिमटा हुआ था (इसमें मिठाइयों, उपहारों व पैकिंग का अलग कारोबार शामिल है)।

​ रोहित कत्याल ने इस बात पर जोर दिया कि यह रिकॉर्ड तोड़ व्यापार इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि देश के आम उपभोक्ताओं का भारतीय उत्पादों के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है। साथ ही, यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय आह्वान ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नीतियों की एक ऐतिहासिक और बड़ी सफलता है।

​’विकसित भारत’ और ‘मोदी गारंटी’ राखियां बनीं खास आकर्षण

रोहित कत्याल ने आगे बताया कि इस साल के बाजारों में पारंपरिक और सामान्य डिजाइन वाली राखियों के साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, राष्ट्र की प्रमुख उपलब्धियों और ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प से प्रेरित विशेष थीम आधारित राखियों की भारी मांग देखी जा रही है।

इन विशेष श्रेणियों में ​‘विकसित भारत राखी’, ​‘मोदी गारंटी राखी’, ​‘ब्रह्मोस राखी’, ​‘आत्मनिर्भर भारत राखी’, ​‘वोकल फॉर लोकल राखी’, ​‘भारत गौरव राखी’, ​‘नारी वंदन राखी’, ‘लखपति दीदी राखी’, ​‘नमामि गंगे राखी’, ​‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’, ​और ‘अमृतकाल राखी’ विशेष रूप से देश भर के बाजारों में धूम मचा रही हैं और लोगों में खासा लोकप्रिय हो रही हैं।

कैट के जिला चेयरमैन नरेंद्र तनेजा ने इस संदर्भ में अपने विचार रखते हुए कहा कि इन विशेष राखियों के माध्यम से देश की बहनें केवल अपनी कलाई पर रक्षा सूत्र ही नहीं बांध रही हैं, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण, महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी अभियान, पर्यावरण संरक्षण और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी गहरी भावनाओं और प्रतिबद्धता को भी पूरी शिद्दत से अभिव्यक्त कर रही हैं। विशेष तौर पर देश के युवाओं और छोटे बच्चों में ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘विकसित भारत राखी’ को लेकर अभूतपूर्व उत्साह और क्रेज देखा जा रहा है।

​देश के कोने-कोने की लोककला और हस्तशिल्प को मिल रहा बढ़ावा

तनेजा ने यह भी रेखांकित किया कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों की समृद्ध कला, संस्कृति और स्थानीय कारीगरी को प्रदर्शित करने वाली राखियां भी बाजारों में खरीदारों की पहली पसंद बनी हुई हैं।

इनमें प्रमुख रूप से ​नागपुर की खादी राखी, ​जयपुर की प्रसिद्ध सांगानेरी कला राखी, ​पुणे की पर्यावरण-अनुकूल सीड (बीज) राखी, असम की अनूठी चाय पत्ती राखी, कोलकाता की इको-फ्रेंडली जूट राखी, ​मुंबई और कानपुर की मोती (पर्ल) राखी, मुंबई की शानदार सिल्क राखी, बिहार की पारंपरिक मधुबनी पेंटिंग राखी, ​बेंगलुरु की विशेष पुष्प राखी तथा जनजातीय हस्तकला से तैयार विशेष बांस की राखियां बड़ी संख्या में धड़ल्ले से बिक रही हैं। इन उत्पादों के माध्यम से देश के छोटे-छोटे कारीगरों, कुटीर उद्योगों और पारंपरिक हस्तकला से जुड़े हुनरमंद लोगों को एक बहुत बड़ा और राष्ट्रीय स्तर का बाजार मिल रहा है।

​चीनी राखियों का पूरी तरह बहिष्कार और स्वदेशी का संकल्प

​कैट के जिला संरक्षक महेश कर्दम ने देश भर के सभी व्यापारियों और सम्मानित उपभोक्ताओं से पुरजोर अपील की है कि वे रक्षाबंधन और आने वाले अन्य सभी प्रमुख त्योहारों पर केवल और केवल भारतीय उत्पादों को ही अपनी प्राथमिकता दें, ताकि ‘स्वदेशी अपनाओ – भारत बढ़ाओ’ के इस राष्ट्रव्यापी अभियान को और अधिक मजबूती मिल सके।

उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था, कुटीर उद्योगों, पारंपरिक हस्तशिल्प और लघु उद्यमों को इस समय नई ऊर्जा मिल रही है, जिससे कैट के मूल संकल्प “भारत बनाए – दुनिया अपनाए” को एक ठोस दिशा मिल रही है।

​सबसे खास बात यह है कि इस वर्ष भी देश के किसी भी कोने के बाजारों में चीनी (चाइनीज) राखियों की कोई मांग या नामोनिशान नहीं है। देश के व्यापारी वर्ग और जागरूक उपभोक्ताओं ने पूरी तरह से और शत-प्रतिशत स्वदेशी राखियों को अपनाया है, जिसके चलते बाजारों में केवल और केवल भारतीय निर्मित राखियां ही सुलभ रूप से उपलब्ध हैं।

श्री रोहित कत्याल ने अंत में यह भी जानकारी दी कि कैट देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में विशेष ‘स्वदेशी मेलों’ का आयोजन करने जा रहा है, जहां देश भर की महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और स्थानीय दस्तकारों व कारीगरों द्वारा निर्मित कलात्मक राखियों एवं अन्य स्वदेशी उत्पादों की सीधी बिक्री की जाएगी।

संगठन का स्पष्ट मानना है कि स्वदेशी उत्पादों के प्रति जनता के इस बढ़ते रुझान और “वोकल फॉर लोकल” की भावना के कारण इस बार देश के लाखों छोटे कारीगरों, महिला उद्यमियों, लघु उद्योगों और स्थानीय दुकानदारों को इस रक्षाबंधन के अवसर पर भारी आर्थिक लाभ और संबल प्राप्त होगा।

जैसा कि श्री रोहित कत्याल ने संक्षेप में कहा ​“आज स्वदेशी राखी केवल एक साधारण उत्पाद या धागा मात्र नहीं रह गई है, बल्कि यह सशक्त आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत और हमारे राष्ट्र गौरव का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है।”