मुंबई (अनिल): मुंबई का बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर इन दिनों भारतीय टूलिंग उद्योग के भविष्य का गवाह बन रहा है। TAGMA इंडिया द्वारा आयोजित ‘डाई एंड मोल्ड इंडिया (DMI) 2026’ इंटरनेशनल एग्ज़िबिशन केवल एक प्रदर्शनी मात्र नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती निर्माण क्षमता का प्रतीक बनकर उभरा है। इस आयोजन में 350 से अधिक प्रदर्शक अपनी अत्याधुनिक तकनीकों जैसे सीएनसी (CNC), ऑटोमेशन और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग का प्रदर्शन कर रहे हैं।
साझेदारी और नए विचारों का मंच
एक विशेष साक्षात्कार के दौरान टैगमा इंडिया के अध्यक्ष देवराया एम. शेरेगर ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “DMI 2026 केवल मशीनरी की प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह साझेदारी और नए विचारों का एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहाँ से भारतीय टूलिंग उद्योग की भविष्य की दिशा तय हो रही है।”
आयात निर्भरता को चुनौती
ऑटो सेक्टर के दिग्गज मनोज कोल्हाटकर ने भारतीय बाजार की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत की उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर इशारा करते हुए कहा, “वर्तमान में हम 35 प्रतिशत आयात पर निर्भर हैं, और यही निर्भरता हमारे घरेलू टूलमेकर्स के लिए विकास का सबसे बड़ा अवसर है।”
कौशल विकास पर जोर
उद्योग विशेषज्ञ एफ.आर. सिंघवी ने इस बात पर बल दिया कि तकनीक के साथ-साथ ‘स्किल डेवलपमेंट’ (कौशल विकास) सबसे अनिवार्य आवश्यकता है। उनके अनुसार, कुशल मानव संसाधन ही इस उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकाए रखने की असली ताकत है।
DMI 2026 नवाचार, कौशल और आपसी सहयोग के माध्यम से ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। यह आयोजन भारत को एक ग्लोबल टूलिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

