आगरा: ताजनगरी में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही किताबों की ‘कालाबाजारी’ और निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर विवाद गहरा गया है। रविवार को संजय प्लेस स्थित यूथ हॉस्टल में युवा शक्ति संगठन और वॉयस ऑफ स्कूल एसोसिएशन (बोसा) के पदाधिकारी आमने-सामने आ गए। सोशल मीडिया पर छिड़ी जुबानी जंग ने उस समय भौतिक रूप ले लिया जब संगठन के कार्यकर्ता बोसा की बैठक के बीच विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गए।
“बरसाती मेंढक” वाले बयान ने भड़काई आग
विवाद की जड़ सोशल मीडिया पर बोसा की ओर से जारी किया गया एक कथित विवादित बयान है। इसमें महंगी किताबों और कमीशनखोरी के खिलाफ आवाज उठाने वालों को “बरसाती मेंढक” कहकर संबोधित किया गया था। इस अपमानजनक टिप्पणी से अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया, जिसके विरोध में रविवार को युवा शक्ति संगठन ने तख्तियां दिखाकर अहिंसक लेकिन कड़ा विरोध दर्ज कराया।
’वन नेशन, वन एजुकेशन’ की मांग
युवा शक्ति संगठन के राष्ट्रीय संयोजक योगेश त्यागी के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने स्कूलों में यूनिफॉर्म और किताबों के नाम पर हो रही कथित ठगी को बंद करने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि शिक्षा को व्यापार बनाना बंद किया जाए और पूरे देश में “वन नेशन, वन एजुकेशन” की नीति के तहत समान पाठ्यक्रम लागू होना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक भी हुई।
बोसा ने दिया समान पाठ्यक्रम का आश्वासन
भारी विरोध और चौतरफा दबाव को देखते हुए बोसा (VOSA) के पदाधिकारियों के सुर कुछ नरम पड़े। एसोसिएशन की ओर से आश्वासन दिया गया कि उनके संगठन से जुड़े सभी स्कूलों में एक जैसी किताबें और समान पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। संगठन का दावा है कि इस पहल से अभिभावकों को महंगी किताबों के आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।
अभिभावकों की निगाहें अब कार्रवाई पर
हालांकि स्कूल एसोसिएशन ने आश्वासन दे दिया है, लेकिन अभिभावकों और युवा शक्ति संगठन का कहना है कि वे केवल वादों से संतुष्ट नहीं होंगे। जब तक जमीनी स्तर पर किताबों के दाम कम नहीं होते और कमीशनखोरी बंद नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

