आगरा में स्कूलों की ‘मनमानी’ पर संग्राम: अभिभावक संघ ने खटखटाया DM का दरवाजा; कमीशनखोरी पर रोक की मांग

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आगरा: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही ताजनगरी के निजी स्कूलों में ‘ड्रेस-किताब’ के नाम पर वसूली का खेल फिर शुरू हो गया है। इसके खिलाफ अभिभावक संघ आगरा ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के संयोजक डॉ. मदन मोहन शर्मा के नेतृत्व में गुरुवार को जिलाधिकारी (DM) को ज्ञापन सौंपकर स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

​”शिक्षा सेवा है, व्यापार नहीं”: डॉ. मदन मोहन शर्मा

ज्ञापन सौंपने के दौरान डॉ. मदन मोहन शर्मा ने तीखे लहजे में कहा कि शिक्षा को व्यापार का जरिया बना दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के अधिकांश नामी स्कूल अभिभावकों को विशेष दुकानों से ही महंगे दामों पर जूते, ड्रेस और किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। डॉ. शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि स्कूलों के इस ‘सिंडिकेट’ पर लगाम नहीं कसी गई, तो शहर में एक बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

अभिभावकों पर ‘अनावश्यक’ बोझ: हर साल बदली जा रही ड्रेस

अभिभावक संघ ने अपनी शिकायतों में प्रमुखता से इन बिंदुओं को उठाया है:

निर्धारित दुकानों का एकाधिकार: स्कूल प्रबंधन द्वारा कमीशन के चक्कर में खास दुकानों से ही सामग्री लेने का दबाव बनाया जा रहा है।

​बार-बार ड्रेस में बदलाव: हर साल ड्रेस के रंग या डिजाइन में मामूली बदलाव कर अभिभावकों को नई ड्रेस खरीदने पर मजबूर किया जाता है।

महंगी किताबें: एनसीईआरटी (NCERT) के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपी जा रही हैं।

प्रशासन से संघ की प्रमुख मांगें:

स्कूलों द्वारा सामग्री पर अपना एकाधिकार (Monopoly) तुरंत समाप्त किया जाए।

अभिभावकों को खुले बाजार से कहीं से भी सामान खरीदने की पूरी स्वतंत्रता मिले।

​कम से कम 3 से 5 साल तक स्कूल ड्रेस में किसी भी प्रकार का बदलाव न किया जाए।

दोषी स्कूलों की मान्यता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई हो।
​शिक्षा विभाग इस संबंध में स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश जारी करे।

जागरूकता की अपील

संघ ने शहर के सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे स्कूलों के इस शोषण के खिलाफ आवाज उठाएं और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें। प्रशासन को दिए गए इस ज्ञापन के बाद अब शहर के हजारों अभिभावकों की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।