मथुरा/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान-इजरायल के बीच गहराते युद्ध के बाद भारत में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन आपूर्ति की अनिश्चितता के बीच मथुरा के प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर ‘ज्वाला’ की तरह फैल रहा है। इस वीडियो में उन्होंने न केवल संभावित गैस संकट पर अपनी राय रखी है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली और पुरुषों की शारीरिक क्षमता को लेकर एक विवादित बहस छेड़ दी है।
”ईंधन संकट और चूल्हे की ओर वापसी”
ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते भारत में एलपीजी (LPG) की उपलब्धता पर उठ रहे सवालों के बीच देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो देश को फिर से मिट्टी के चूल्हों के पुराने दौर में लौटना पड़ सकता है। उन्होंने पारंपरिक चूल्हे पर बनी रोटी की वकालत करते हुए कहा कि पुराने समय का जीवन अधिक संतुलित और प्राकृतिक था। हालांकि, उन्होंने धुएं की समस्या को स्वीकार किया, लेकिन दावा किया कि गैस पर बना भोजन बीमारियों की जड़ है।
“आज के पुरुषों में दम नहीं रहा” – विवादित टिप्पणी से मचा बवाल
वीडियो का सबसे चर्चित हिस्सा वह है जिसमें ठाकुर ने सीधा प्रहार करते हुए कहा, “आज के पुरुषों में पहले जैसा दम नहीं रहा।” उन्होंने शारीरिक क्षमता में आई इस गिरावट का सीधा संबंध गैस पर बनी रोटियों और आधुनिक खान-पान से जोड़ दिया। जहाँ एक बड़ा वर्ग इसे पारंपरिक जीवनशैली की वापसी का संदेश मान रहा है, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे वैज्ञानिक आधार से परे और अतिशयोक्ति करार दिया है। विशेषज्ञों का तर्क है कि शारीरिक शक्ति का संबंध समग्र पोषण और व्यायाम से है, न कि केवल खाना पकाने के माध्यम से।
सरकार की तैयारी बनाम बाजार की आशंका
यह पूरा विवाद ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैश्विक आयात पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने का डर बना हुआ है। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के पास पर्याप्त गैस भंडार मौजूद है और जनता को पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और घरेलू राजनीति के इस दौर में देवकीनंदन ठाकुर जैसे सामाजिक-धार्मिक व्यक्तित्वों के बयान जनमानस के बीच नई चर्चाओं को जन्म दे रहे हैं।

