फिरोजाबाद जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की शर्मनाक विफलता: एंबुलेंस न मिलने पर, स्ट्रेचर पर मरीज लेकर दौड़ते रहे परिजन…20 वर्षीय युवती ने तड़पकर तोड़ा दम

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डायलिसिस के दौरान बिगड़ी 20 वर्षीय कीर्ति की हालत

ट्रॉमा सेंटर ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस से मांगी गई थी मदद

एंबुलेंस कर्मियों पर मरीज को ले जाने से इनकार करने का आरोप

स्ट्रेचर पर ले जाते समय अस्पताल परिसर में ही हुई मौत

स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल, जवाबदेही तय करने की मांग

फिरोजाबाद: जिला अस्पताल में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई। सिरसागंज थाना क्षेत्र के गांव मदनपुर निवासी 20 वर्षीय कीर्ति की डायलिसिस के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर एंबुलेंस सुविधा नहीं मिलने का आरोप है।

परिजनों का कहना है कि अस्पताल परिसर में एंबुलेंस खड़ी होने के बावजूद मरीज को ट्रॉमा सेंटर तक नहीं पहुंचाया गया और स्ट्रेचर पर ले जाते समय उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली कठघरे में आ गई है।

परिजनों के अनुसार कीर्ति पिछले करीब डेढ़ वर्ष से किडनी की बीमारी के चलते नियमित डायलिसिस करा रही थी। सोमवार को जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में उपचार के दौरान अचानक उसका ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ गया और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सकों ने तत्काल उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर करने का निर्णय लिया।

आरोप है कि डायलिसिस यूनिट से ट्रॉमा सेंटर तक मरीज को पहुंचाने के लिए अस्पताल परिसर में मौजूद 108 एंबुलेंस से सहायता मांगी गई, लेकिन एंबुलेंस कर्मियों ने मरीज को ले जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद अस्पताल कर्मियों और परिजनों ने समय गंवाए बिना कीर्ति को स्ट्रेचर पर ट्रॉमा सेंटर की ओर ले जाना शुरू किया, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

घटना ने जिला अस्पताल की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों और समन्वय पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जिस अस्पताल में हर पल जीवन बचाने का दावा किया जाता है, वहीं एक गंभीर मरीज को अस्पताल परिसर के भीतर ही समय पर एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल सकी। यदि परिजनों के आरोप सही हैं, तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता मानी जाएगी।

मृतका के परिजनों का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध करा दी जाती तो शायद कीर्ति की जान बचाई जा सकती थी। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और संवेदनहीन रवैये ने उनकी बेटी की जिंदगी छीन ली।

फिलहाल इस पूरे मामले में जिला अस्पताल प्रशासन और 108 एंबुलेंस सेवा की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही, एंबुलेंस संचालन व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

रिपोर्ट- JP सिंह विशेष संवाददाता