दयालबाग शिक्षण संस्थान में ‘शिक्षा में एआई’ का आगाज़: पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में 114 शिक्षकों ने लिया प्रशिक्षण

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आगरा। दयालबाग शिक्षण संस्थान (डीईआई) ने बदलते समय की मांग को समझते हुए ‘शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)’ विषय पर एक पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) का शुभारंभ किया है। एआईयू-डीईआई अकादमिक एवं प्रशासनिक विकास केंद्र के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के 114 शिक्षाविद हाइब्रिड मोड में हिस्सा ले रहे हैं।

 कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और शिक्षाविदों को एआई की नवीनतम तकनीकों से परिचित कराना तथा शिक्षण, अधिगम, मूल्यांकन और शोध कार्यों में उसके प्रभावी, जिम्मेदार एवं नैतिक उपयोग के लिए सक्षम बनाना है। देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से 114 प्रतिभागी हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में इस कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान की प्रार्थना के साथ हुआ। इसके बाद कार्यक्रम की संयोजक डॉ. नेहा जैन ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए एफडीपी की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी।

प्रो. एन.पी.एस. चंदेल, अधिष्ठाता, शिक्षा संकाय ने मुख्य अतिथि का परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन ला रही है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को भविष्य की चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य वक्तव्य देते हुए प्रो. सी. पटवर्धन, निदेशक, दयालबाग शिक्षण संस्थान ने उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल एआई टूल्स का उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सही और स्पष्ट प्रॉम्प्ट देना सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रश्न पूछना भी एक कला है और यदि एआई को सटीक एवं प्रभावी निर्देश दिए जाएं, तो वह उपयोगी, सटीक और व्यावहारिक समाधान प्रदान कर सकता है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे एआई को नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, शोध और ज्ञान-सृजन का प्रभावी माध्यम बनाएं तथा मानवीय मूल्यों के साथ उसका संतुलित उपयोग सुनिश्चित करें।

प्रो. नंदिता सतसंगी, विभागाध्यक्ष, शिक्षा संकाय ने मुख्य अतिथि डॉ. अमित भगत, मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल का स्वागत किया। अपने उद्घाटन व्याख्यान में डॉ. अमित भगत ने शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्तरदायी और नैतिक उपयोग पर विशेष जोर देते हुए कहा कि एआई का उद्देश्य शिक्षक का स्थान लेना नहीं, बल्कि उनकी सृजनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन और शिक्षण क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने शिक्षकों से एआई आधारित तकनीकों का विवेकपूर्ण उपयोग कर विद्यार्थियों के समग्र विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षाविद एवं विशेषज्ञ अपने व्याख्यान देंगे। इनमें प्रो. विनोद कुमार कंवरिया (दिल्ली विश्वविद्यालय), प्रो. सुनीता तंवर (हरियाणा विश्वविद्यालय), प्रो. किरण लता डंगवाल (लखनऊ विश्वविद्यालय), डॉ. रक्षा बेंजवाल (सीजीसी विश्वविद्यालय, मोहाली), डॉ. ए. चरण कुमारी, डॉ. आर. जेयम तथा श्री हार्दिक चड्ढा (दयालबाग शिक्षण संस्थान) शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यान, व्यावहारिक प्रशिक्षण और संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे।

यह पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम एआईयू–डीईआई अकादमिक एवं प्रशासनिक विकास केंद्र के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. ज्योति गोगिया, नोडल अधिकारी, एआईयू–डीईआई–एएडीसी का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने कार्यक्रम के नियोजन, समन्वयन और संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई।

उद्घाटन सत्र का समापन प्रो. सविता श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, बी.एड. द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इसके बाद विश्वविद्यालय गान प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. पल्लवी दुबे एवं डॉ. नीतू सिंह, सह-संयोजकों ने किया।