बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से शुरू हुआ ‘स्कूल चलो अभियान’; सीएम योगी ने दी शिक्षा और मानदेय की सौगात

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वाराणसी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को धर्मनगरी काशी से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया। सुबह बाबा विश्वनाथ और कालभैरव के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद, मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘स्कूल चलो अभियान’ का भव्य शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने न केवल बच्चों को पाठ्यपुस्तकें और प्रमाण-पत्र बांटे, बल्कि शिक्षकों और शिक्षामित्रों के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

​मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी: शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की बल्ले-बल्ले

मुख्यमंत्री ने शिक्षा जगत से जुड़े कर्मियों को बड़ा तोहफा देते हुए घोषणा की कि इसी महीने से अनुदेशकों को 17,000 रुपये और शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये का मानदेय मिलना शुरू हो जाएगा। उन्होंने शिक्षकों से अपील करते हुए कहा, “जहाँ आप पढ़ा रहे हैं, अपने बच्चों को भी वहीं लेकर जाइए। जब आपका बच्चा वहां पढ़ेगा, तभी एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और विश्वास आगे बढ़ेगा।”

​2017 से पहले बनाम आज का उत्तर प्रदेश

विपक्ष पर सीधा हमला बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले शिक्षा सरकार के एजेंडे में ही नहीं थी। उन्होंने कहा, “तब गरीब बच्चों की चिंता किसी को नहीं थी क्योंकि ‘उनके लोग’ नकल कराते थे। आज परिवेश और पद्धति दोनों बदल चुके हैं। अब बच्चों को पारंपरिक शिक्षा के साथ तकनीकी शिक्षा भी दी जा रही है ताकि वे रोजगार के काबिल बन सकें।”

​ऑपरेशन कायाकल्प: 80 हजार करोड़ का निवेश

मुख्यमंत्री ने बताया कि डबल इंजन की सरकार यूपी की स्कूली शिक्षा पर सालाना 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रही है। ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की सफलता का श्रेय उन्होंने शिक्षकों की कड़ी मेहनत को दिया। उन्होंने गर्व से कहा कि आज हर बच्चे को दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते, मोजे और स्वेटर जैसी सभी सुविधाएं पूरी तरह फ्री उपलब्ध कराई जा रही हैं।

निपुण भारत का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने ‘निपुण विद्यालयों’ और ‘निपुण विद्यार्थियों’ को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर मिड-डे मील का स्वाद भी चखा। उन्होंने जोर देकर कहा, “शिक्षा सिर्फ डिग्री का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य को मनुष्य बनाने का सशक्त मार्ग है। जब एक बच्चा साक्षर होता है, तो पूरा राष्ट्र समृद्धि की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता है।”

​शत-प्रतिशत नामांकन के लक्ष्य के साथ शुरू हुआ यह अभियान उत्तर प्रदेश के स्वर्णिम भविष्य की नींव रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।