आगरा: उत्तर प्रदेश सरकार के नौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती बेबीरानी मौर्य ने रविवार को बालूगंज स्थित कैंप कार्यालय में प्रेस वार्ता कर महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण से जुड़ी उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण अब केवल नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बन चुका है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि “सुरक्षित नारी, सक्षम नारी और स्वावलंबी नारी ही समृद्ध उत्तर प्रदेश की आधारशिला है।” उनके अनुसार, सरकार ने महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और अवसर देने की दिशा में समेकित मॉडल विकसित किया है, जिसमें जन्म से लेकर शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता तक की पूरी श्रृंखला शामिल है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की भूमिका तेजी से बदली है। “अब महिलाएं नौकरी नहीं ढूंढ रहीं, बल्कि अवसर खुद बना रही हैं।” औद्योगिक क्षेत्रों में नाइट शिफ्ट की अनुमति को उन्होंने इस बदलाव का अहम कदम बताया, जिससे महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुले हैं।
मंत्री के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग अब केवल योजनाओं के संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम बन चुका है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से 26.81 लाख बेटियां लाभान्वित हुई हैं, जबकि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजनाओं के तहत 1.05 लाख से अधिक बच्चों को संरक्षण और सहायता दी गई है। मिशन वात्सल्य के जरिए एक लाख से अधिक बच्चों को उनके परिवारों से जोड़ा गया।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताओं को लाभ मिला है। संस्थागत प्रसव दर 84 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है और एनीमिया की दर में भी कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि यह संकेत है कि उत्तर प्रदेश अब स्वास्थ्य सूचकांकों में तेजी से सुधार करने वाला राज्य बन रहा है।
पोषण के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि 2.12 करोड़ लाभार्थियों को अनुपूरक पुष्टाहार दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को हॉट कुक्ड मील उपलब्ध कराया जा रहा है और कुपोषण के खिलाफ तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू की गई है। प्रदेश में स्टंटिंग और अंडरवेट की दर में उल्लेखनीय कमी आई है।
महिला सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि वन स्टॉप सेंटर से 2.39 लाख महिलाओं को सहायता मिली है, जबकि 181 हेल्पलाइन के माध्यम से 8.42 लाख मामलों में मदद पहुंचाई गई। रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष के तहत 14,559 पीड़िताओं को 511 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है।
आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में बीसी सखी और विद्युत सखी मॉडल को उन्होंने बड़ी सफलता बताया। प्रदेश में 39,885 बीसी सखियों ने 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन किया है, जबकि हजारों महिलाओं ने विद्युत बिल संग्रहण के जरिए आय अर्जित की है। महिला स्वयं सहायता समूहों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जोड़कर स्थायी आय के अवसर भी उपलब्ध कराए गए हैं।
रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा महिला उद्यमी योजनाएं चलाई जा रही हैं। महिला उत्पादों के विपणन के लिए एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और प्रमुख बाजारों में शोरूम स्थापित करने की योजना है। साथ ही, महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ब्याज मुक्त पूंजी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
महिला सुरक्षा व्यवस्था में सुधार का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि यूपी-112 का रिस्पांस टाइम घटकर 6 मिनट 41 सेकेंड रह गया है। मिशन शक्ति अभियान के तहत थानों में विशेष केंद्र स्थापित किए गए हैं और अपराधों में कमी दर्ज की गई है। प्रदेश में महिला पुलिस बल की संख्या बढ़कर 44 हजार से अधिक हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि “जब नीयत साफ होती है, तो नीतियां समाज बदल देती हैं।” उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है, जहां महिलाओं को योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि भागीदार बनाया जा रहा है।
प्रेस वार्ता के अंत में मंत्री ने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता प्रदान कर प्रदेश को समृद्ध बनाना है।

