राम मंदिर चढ़ावा कांड: सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली, ‘ड्यूटी चार्ट’ के भरोसे हो रही थी रामलला के खजाने में सेंधमारी

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अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में चढ़ावे की राशि और आभूषणों की चोरी के मामले ने मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा और कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, यह चोरी किसी पेशेवर चालाकी से अधिक ट्रस्ट की ढीली व्यवस्था का परिणाम प्रतीत हो रही है।

​सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर दी जा रही थी एंट्री

अति-सुरक्षित माने जाने वाले राम मंदिर परिसर में सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ती दिखाई दीं। मार्च 2025 में कैश काउंटिंग के लिए रखे गए 10 नए कर्मचारियों के लिए कोई आधिकारिक पहचान पत्र (आई-कार्ड) जारी नहीं किया गया था। सुरक्षा जांच के नाम पर इन्हें केवल एक ‘ड्यूटी चार्ट’ थमा दिया जाता था। सुरक्षाकर्मी इसी कागज के टुकड़े को देखकर बिना किसी बायोमेट्रिक या कठोर सत्यापन के उन्हें मंदिर के सबसे गोपनीय हिस्से यानी कैश काउंटिंग रूम तक जाने की अनुमति दे देते थे।

​‘कमांड कंट्रोल’ और नियुक्तियों में बरती गई लापरवाही

सूत्रों के अनुसार, चंपत राय (महासचिव) द्वारा इन 10 उम्मीदवारों को चुनकर डॉ. अनिल मिश्रा के पास भेजा गया था। 4 मार्च 2025 को इंटरव्यू के महज दो दिन बाद, 6 मार्च को इन सभी की नियुक्ति 18,000 रुपये के मासिक वेतन पर कर दी गई। इस दौरान न तो किसी का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया गया और न ही सुरक्षा मानकों का पालन हुआ। पूरी व्यवस्था डॉ. अनिल मिश्रा के ‘कमांड कंट्रोल’ और शीर्ष नेतृत्व द्वारा दी गई छूट के भरोसे चलती रही।

​सीसीटीवी के सामने चोरी का खेल

हैरानी की बात यह है कि परिसर में स्थित ‘पुलिस चौकी’ के भीतर एक दूसरा काउंटिंग सेंटर बनाया गया था। अनुकल्प, अविनाश, करुणेश, लवकुश और अन्य आरोपियों ने इसी कमरे में वारदातों को अंजाम दिया। इस कमरे में सीसीटीवी कैमरा और उसकी मॉनिटर स्क्रीन दोनों मौजूद थे, जिससे आरोपी खुद देख सकते थे कि वे कैमरे की जद में हैं या नहीं।

वहीं, पीएफसी (Pilgrim Facilitation Centre) भवन के मॉनिटरिंग रूम में तैनात सुरक्षाकर्मी अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतते रहे, जिससे चोरों को बिना किसी भय के वारदात का मौका मिलता रहा।

​इंचार्ज ने दबाई शिकायत, कहा—‘प्रभु देख रहे हैं’

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि चोरी की जानकारी प्रबंधन को फरवरी महीने में ही मिल गई थी। काउंटिंग टीम के एक ईमानदार सदस्य ने जब इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी) को इसकी सूचना दी, तो कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने इसे “प्रभु सब देख ही रहे हैं” कहकर टाल दिया। इस प्रकार की गैर-जिम्मेदाराना प्रतिक्रिया ने चोरों के हौसले बुलंद कर दिए।

स्वर्ण-रजत आभूषणों के व्यवस्थित रिकॉर्ड के अभाव और जिम्मेदारों की चुप्पी के कारण यह घोटाला महीनों तक चलता रहा। फिलहाल, पुलिस प्रशासन ने ‘ड्यूटी चार्ट’ और आरोपियों की प्रोफाइल के आधार पर जांच का दायरा बढ़ा दिया है और इस मामले में शामिल सभी कड़ियों को खंगाला जा रहा है।