लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच जारी तल्खी एक बार फिर चरम पर है। मंत्री राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कई गंभीर आरोप लगाए, जिसके जवाब में सपा नेता फाखरुल हसन चांद ने बेहद तीखी और तंज भरी टिप्पणी की है।
ओपी राजभर के गंभीर आरोप
मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कन्नौज की सांसद निधि के खर्च पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के नाम पर केवल एक विशेष समुदाय को प्राथमिकता दी जा रही है। राजभर ने कहा, “विकास के नाम पर आपको सिर्फ ‘सपाई अब्दुल्लों’ की गलियां ही दिखीं? जाटव, धानुक, धोबी और लोधी जैसी अन्य जातियों की उपेक्षा क्यों की जा रही है?”
राजभर ने सपा के 13 वर्षों के कार्यकाल (पूर्व सरकारों के संदर्भ में) को लेकर आरोप लगाया कि ओबीसी आरक्षण का लाभ केवल एक विशेष वर्ग (यादव और मुस्लिम) तक सीमित रहा, जिससे पाल, प्रजापति, बिंद, केवट, राजभर, निषाद और अन्य अति पिछड़े व दलित समाज के बच्चे मजदूरी और रिक्शा चलाने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने मुरादाबाद और बांदा की घटनाओं का जिक्र करते हुए सपा पर अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से दबंगई और गुंडई करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अति पिछड़ों के अधिकारों के लिए किसी भी कीमत पर झुकने वाले नहीं हैं।
सपा नेता फाखरुल हसन चांद का पलटवार
ओपी राजभर के इन आरोपों पर सपा नेता फाखरुल हसन चांद ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर व्यंग्य करते हुए लिखा, “नूरमंज़िल मानसिक चिकित्सालय, लालबाग़, लखनऊ में मैंने डॉक्टर नायडू जी से बात कर ली है। आपकी बीमारी अभी लाइलाज नहीं है, ठीक हो जाएंगे। आपका प्राइवेट रूम नंबर 420 बुक है, आप एडमिट हो जाएं। आपकी बीमारी का पूरा खर्च समाजवादी पार्टी उठाएगी।”
सपा नेता ने आगे कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा से तो उन्हें ‘रोजाना दाना’ मिल रहा है, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद राजभर की राजनीति समाप्त हो जाएगी। उन्होंने ईश्वर से राजभर के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हुए राजनीतिक रूप से उन्हें आड़े हाथों लिया।
बढ़ती राजनीतिक कटुता
ओपी राजभर ने सपा को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अखिलेश यादव को परेशानी राजभर से है, तो वे सीधे उनसे लड़ें। उन्होंने सपा को सुधार की सलाह देते हुए कहा कि पार्टी के अंदर व्याप्त गुंडई के कारण ही सपा का टूटना तय है। राज्य की राजनीति में यह वाकयुद्ध अब एक बड़े टकराव के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ दोनों दल एक-दूसरे को वैचारिक और राजनीतिक रूप से नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।


