नई दिल्ली: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में ब्रह्मकुमारी संस्थान के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘सशक्त भारत के लिए कर्मयोग’ का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने गुरुग्राम स्थित ‘ओम शांति रिट्रीट सेंटर’ के रजत जयंती समारोह का भी शुभारंभ किया।
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के सतत और समग्र विकास के लिए भौतिक प्रगति के साथ नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता का संगम अनिवार्य है। उन्होंने आगाह किया कि नैतिकता के बिना आर्थिक और तकनीकी विकास समाज में असंतुलन पैदा कर सकता है। अनैतिक प्रगति न केवल संसाधनों के केंद्रीकरण का कारण बनती है, बल्कि पर्यावरण और कमजोर वर्गों के शोषण का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
कर्मयोग से विकसित भारत का संकल्प
राष्ट्रपति ने ‘कर्मयोग’ की व्याख्या करते हुए कहा कि यह केवल आत्मचिंतन तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने दायित्वों को निभाते हुए उच्च आध्यात्मिक सिद्धांतों का पालन करना है। उन्होंने कहा कि जब शासन और प्रशासन के निर्णय आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित होते हैं, तो वे निष्पक्ष और सर्व-कल्याणकारी बनते हैं।
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि कर्मयोग के माध्यम से प्रत्येक नागरिक देश के विकास में योगदान देकर भारत को विश्व के लिए एक ‘मूल्य-आधारित जीवन’ का आदर्श बना सकता है।

