मुंबई। टीवी की दुनिया बाहर से जितनी रंगीन और चमकदार नजर आती है, पर्दे के पीछे कलाकारों की जिंदगी उतनी ही कठिन संघर्षों से भरी होती है। यह बात जर्नलिस्ट्स मीडिया एसोसिएशन महाराष्ट्र राज्य कमेटी के नववर्ष 2026 कैलेंडर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान सामने आई, जब CINTAA (सिंटा) की प्रेसिडेंट पूनम ढिल्लों से बातचीत हुई।
इस संवाद में उन्होंने टीवी इंडस्ट्री के उन कलाकारों की परेशानियों को सामने रखा, जो रोज़ाना शूटिंग में मेहनत करते हैं, लेकिन समय पर मेहनताना और बुनियादी अधिकार पाने के लिए भी जूझते रहते हैं।
90 दिन बाद मिलता है पेमेंट
पूनम ढिल्लों ने बताया कि टीवी आर्टिस्टों को आज भी कई प्रोड्यूसर्स द्वारा 90 दिनों बाद भुगतान किया जाता है। हालात तब और गंभीर हो जाते हैं, जब 1-2 दिन के कैरेक्टर रोल करने वाले कलाकारों से कई बार एग्रीमेंट तक नहीं कराया जाता, जिससे उनका मेहनताना या तो देर से मिलता है या कई मामलों में मिलता ही नहीं।
ऐसे मामलों में सिंटा को हस्तक्षेप कर प्रोड्यूसर्स पर भुगतान का दबाव बनाना पड़ता है।
कन्वेयंस भी बंद, कलाकारों पर बढ़ा बोझ
उन्होंने बताया कि पहले कैरेक्टर आर्टिस्टों को प्रोड्यूसर्स की ओर से 500 रुपये कन्वेयंस दिया जाता था, जिससे उन्हें आने-जाने में राहत मिलती थी। लेकिन अब कई बार अनुरोध करने के बावजूद भी अधिकांश प्रोड्यूसर्स कन्वेयंस देने से इनकार कर रहे हैं, जिससे छोटे कलाकारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
8 घंटे की शिफ्ट अब 12 घंटे, कई बार 16 घंटे तक शूटिंग
CINTAA अध्यक्ष ने बताया कि पहले शूटिंग शिफ्ट 8 घंटे की होती थी, जिसे अब बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया गया है। कई बार शूटिंग 15-16 घंटे तक खिंच जाती है, लेकिन इसके बावजूद कई प्रोड्यूसर्स ओवरटाइम का भुगतान नहीं करते।
उन्होंने कहा कि लागत कम करने की होड़ में शूटिंग के दौरान मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता भी लगातार गिर रही है।
बड़े स्टार्स को नहीं झेलनी पड़ती ये परेशानियां
पूनम ढिल्लों ने कहा कि बड़े स्टार्स को आमतौर पर इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता, क्योंकि प्रोड्यूसर्स की कमाई उन्हीं से जुड़ी होती है, इसलिए उनकी सुविधाओं और भुगतान का विशेष ध्यान रखा जाता है। लेकिन टीवी इंडस्ट्री की असल रीढ़ माने जाने वाले कैरेक्टर आर्टिस्ट आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सरकार तक पहुंची बात, लेकिन अब तक ठोस अमल नहीं
उन्होंने बताया कि इन मुद्दों को लेकर वे कई बार केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों व अधिकारियों से मिल चुकी हैं। कुछ प्रयास जरूर हुए, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्यान्वयन नहीं हो पाया, जिससे कलाकारों की तकलीफें अब भी बनी हुई हैं।
उम्मीद बरकरार
इसके बावजूद पूनम ढिल्लों ने भरोसा जताया कि जल्द ही सरकार और प्रशासन इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगा और कलाकारों के हित में ठोस व कारगर कदम उठाए जाएंगे।
टीवी की चमकदार दुनिया के पीछे छुपे संघर्षों को उजागर करती यह बातचीत कलाकारों के अधिकारों की दिशा में बदलाव की एक मजबूत शुरुआत मानी जा रही है।

