अयोध्या अग्निकांड पर सियासत तेज: अखिलेश यादव ने उठाए ‘वसूली’ और ‘प्रबंधन’ पर सवाल, मंत्री दयाशंकर बोले—यज्ञ के बाद लगी आग

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​अयोध्या: रामनगरी के राजघाट में आयोजित नौ दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के समापन के बाद शनिवार को हुए भीषण अग्निकांड ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। एक ओर जहाँ परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इसे एक दुर्घटना बताते हुए राहत की बात कही है, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस आयोजन के पीछे के ‘आर्थिक स्रोतों’ और ‘विभागीय वसूली’ के गंभीर आरोप लगाकर सरकार को घेरा है।

अचानक भड़की आग, धू-धू कर जला पंडाल

महायज्ञ के अंतिम दिन शनिवार दोपहर जब आयोजन लगभग संपन्न हो चुका था, तभी अचानक यज्ञशाला में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरे कपड़े के पंडाल को अपनी चपेट में ले लिया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय यज्ञशाला खाली थी, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।

​मंत्री दयाशंकर सिंह की सफाई: “यज्ञ सकुशल संपन्न हुआ”

आयोजन की अध्यक्षता कर रहे परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने घटना पर बयान जारी करते हुए कहा ​”महायज्ञ पूरी तरह सकुशल संपन्न हो गया था। पूर्णाहुति के बाद जब यज्ञशाला खाली थी, तब यह आग लगी। कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ है। आग लगने के तकनीकी कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी।”

अखिलेश यादव का हमला: “पैसे बचाने के चक्कर में हुआ हादसा”

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस अग्निकांड का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही करार देते हुए कुप्रबंधन का आरोप लगाकर कहा कि यह आग सही प्रबंधन और प्रशासनिक कमी को दर्शाती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जनता में चर्चा है कि इस यज्ञ के नाम पर संबंधित विभाग से विभागीय स्तर पर बड़ी वसूली की गई। सपा अध्यक्ष ने मांग की कि यज्ञ के आर्थिक और मानवीय स्रोतों की जांच हो। उन्होंने दावा किया कि पैसे बचाने के चक्कर में विशेषज्ञों की देखरेख के बिना यह आयोजन किया गया, जो निंदनीय है।

सुरक्षा पर उठे सवाल

राम मंदिर से कुछ ही दूरी पर हुए इस बड़े आयोजन में आग लगने के बाद अब सुरक्षा मानकों को लेकर बहस छिड़ गई है। लाखों की भीड़ और 1,251 हवन कुंडों वाले इस संवेदनशील आयोजन में फायर सेफ्टी की क्या व्यवस्था थी, इसकी जांच अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।