नई दिल्ली : नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) द्वारा कक्षा-8 की सोशल साइंस की नई किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का जिक्र किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी को भी न्यायिक प्रणाली की छवि धूमिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कपिल सिब्बल और सिंघवी ने उठाया मुद्दा
बुधवार को सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस गंभीर विषय को सीजेआई के समक्ष रखा। वकीलों ने चिंता जताई कि स्कूली बच्चों को न्यायपालिका के बारे में नकारात्मक जानकारी दी जा रही है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “पूरे देश के वकील और जज इस बात को लेकर चिंतित हैं। न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में मैं अपनी भूमिका निभाऊंगा और इस मामले पर जल्द सुनवाई होगी।”
क्या है किताब में विवादित कंटेंट?
एनसीईआरटी की नई पुस्तक के ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक वाले अध्याय में भ्रष्टाचार को न्यायिक प्रणाली के सामने एक बड़ी चुनौती बताया गया है।
किताब में बताया गया है कि जिला अदालतों में 4.70 करोड़, हाईकोर्ट्स में 62.40 लाख और सुप्रीम कोर्ट में 81,000 मामले लंबित हैं। चैप्टर में लिखा है कि न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर लोगों को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है, जिससे गरीबों के लिए न्याय पाना कठिन हो जाता है। पुस्तक में पूर्व सीजेआई बी.आर. गवई के बयानों का भी हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया था।
जस्टिस बागची ने बताया ‘संविधान पर हमला’
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस अध्याय को संविधान की मूल संरचना पर प्रहार बताया है। कोर्ट का मानना है कि इस तरह का कंटेंट छात्रों के मन में न्यायपालिका के प्रति अविश्वास पैदा कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट अब इस बात की समीक्षा करेगा कि क्या एनसीईआरटी ने न्यायिक प्रणाली की चुनौतियों को पेश करने में मर्यादा की सीमा लांघी है।

