बिना सिफारिश नहीं मिलता बेड….लखनऊ के सबसे बड़े अस्पताल में मरीज के साथ भटकते बीजेपी कार्यकर्ता का दर्द छलका

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की हाई-टेक स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की हवा उस वक्त निकल गई, जब सत्ताधारी दल के ही एक कार्यकर्ता को राजधानी के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ा। अमेठी निवासी श्रीकांत, जो खुद को भाजपा कार्यकर्ता बता रहे हैं, अपने परिवार के एक मरीज को लेकर लखनऊ पहुंचे थे। घंटों के इंतजार और तमाम कोशिशों के बावजूद जब मरीज को बेड नहीं मिला, तो उनका दर्द एक वीडियो के जरिए बाहर आया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

नेताओं को फोन किया, पर नहीं हुई सुनवाई

वीडियो में श्रीकांत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक समेत कई बड़े नेताओं और रसूखदारों से संपर्क किया, लेकिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के बड़े सरकारी अस्पतालों की स्थिति बेहद दयनीय है। उनका दावा है कि इन अस्पतालों में आम आदमी के लिए बेड मिलना मुमकिन नहीं है; जब तक आपके पास कोई तगड़ी सिफारिश न हो, आपको भर्ती तक नहीं किया जाता।

कांग्रेस ने साधा तीखा निशाना

इस घटना को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। यूपी कांग्रेस ने शुक्रवार को इस वीडियो को साझा करते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को ‘वेंटिलेटर’ पर बताया। कांग्रेस ने आधिकारिक बयान में कहा कि लखनऊ के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं का अकाल पड़ा है। घंटों लाइन में लगने के बाद भी न तो बेड मिल रहा है और न ही स्टाफ सहयोग कर रहा है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि अब तो भाजपा को वोट देने वाले समर्थक भी इस बदहाली की गवाही दे रहे हैं।

​”छापेमारी की नौटंकी का हुआ पर्दाफाश”

कांग्रेस ने सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक पर हमला बोलते हुए उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। पार्टी ने लिखा कि स्वास्थ्य मंत्री की ‘छापेमारी’ महज एक कैमरों वाली नौटंकी साबित हुई है। जनता के टैक्स का पैसा कहां जा रहा है, इसका कोई हिसाब नहीं है।

कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या जनता ने अस्पतालों में तड़पने के लिए वोट दिया था? यह वीडियो अब प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है और सरकारी दावों पर सवालिया निशान लगा रहा है।