मुंबई (अनिल बेदाग): भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अब पारंपरिक ईंट-गारों की दुनिया से निकलकर एक परिपक्व और पारदर्शी वैश्विक ‘एसेट क्लास’ के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। मुंबई में आयोजित भव्य सम्मेलन ‘एक्सेलरेट 2026’ ने इस बदलाव की एक सशक्त तस्वीर पेश की। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के 750 से अधिक दिग्गज निवेशकों, नीति-निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने शिरकत की और सेक्टर के भविष्य के ब्लूप्रिंट पर गहन मंथन किया।
संस्थागत निवेश और आधुनिक वित्त का दौर
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण यह रहा कि अब भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर पारंपरिक पारिवारिक फंडिंग पर निर्भर नहीं है। इसकी जगह अब रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs), स्मॉल-एंड-मीडियम ट्रस्ट और प्राइवेट इक्विटी जैसे आधुनिक वित्तीय माध्यमों ने ले ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थागत पूंजी (Institutional Capital) के आने से प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और समयबद्धता में बड़ा सुधार आया है।
शहरीकरण की महा-लहर
दिग्गज रियल एस्टेट डेवलपर डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने अपने संबोधन में भविष्य की एक बड़ी तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा, “वर्ष 2047 तक भारत का शहरीकरण 50 प्रतिशत के स्तर को छू सकता है। यह बदलाव न केवल घरों की मांग बढ़ाएगा, बल्कि रियल एस्टेट के विकास के पूरे स्वरूप को ही बदल कर रख देगा।”
पारदर्शिता बनी निवेश की कुंजी
सम्मेलन में चर्चा हुई कि RERA, GST और RBI की ठोस नीतियों ने सेक्टर की ‘साफ-सफाई’ की है। प्रशांत शर्मा के अनुसार, इन सुधारों ने निवेशकों के मन से डर निकालकर विश्वास पैदा किया है। वहीं, विकास जैन ने रेखांकित किया कि वर्तमान में घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा अपने उच्चतम स्तर पर है, जो भारतीय बाजार की मजबूती का सबसे बड़ा प्रमाण है।
भविष्य के नए ‘ग्रोथ इंजन’
‘एक्सेलरेट 2026’ में कुछ उभरते हुए क्षेत्रों को भविष्य का सितारा बताया गया, जिनमें शामिल हैं:
ब्रांडेड रेजिडेंसेज़: प्रीमियम और लग्जरी जीवनशैली की बढ़ती मांग।
डेटा सेंटर्स: डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ इनकी जरूरत।
हॉस्पिटैलिटी और ग्रीन डेवलपमेंट: पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ निर्माण।
साफ है कि बढ़ती आय, तेज शहरीकरण और ग्लोबल इन्वेस्टमेंट के मेल से भारत का रियल एस्टेट सेक्टर आने वाले दशक में एक अभूतपूर्व स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रहा है।

