नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे: कुछ खास राज्यों की महिलाओं में बढ़ रहा है मोटापा

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इस बारे में हैदराबाद स्थित काउंसिल फ़ॉर सोशल डेवलपमेंट संस्था ने NFHS-5 के आंकड़ों के आधार पर ये शोध किया है.

काउंसिल फ़ॉर सोशल डिवेलपमेंट संस्था में रिसर्च एसोसिएट के पद पर काम कर रहे मोहम्मद शाहिद कहते हैं कि NFHS-4 और NFHS-5 की तुलना की जाए तो आंकड़े काफ़ी चिंताजनक हैं, जहां ये देखा जा सकता है कि महिलाओं में मोटापा बढ़ा है जैसे कि तमिलनाडु में बढ़कर 40.5% , केरल में 38.2%, आंध्रप्रदेश में 36.3% और पुदुच्चेरी में 46.3% में ये बढ़ा है.

वहीं डेटा ये भी कहता है कि 15-49 उम्र में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में मोटापा बढ़ा है.

लेकिन महिलाओं में मोटापा केवल दक्षिणी राज्यों में बढ़ा है ऐसा नहीं है. दिल्ली में ये बढ़कर 41.4% तो पंजाब में 44% हो गया है.

ये कैसे जाना जाए कि किसी व्यक्ति का वज़न अधिक हुआ है या वो मोटा है? बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) शरीर के वज़न और लंबाई से पता चलता है. अगर बीएमआई 25 से ऊपर है तो वज़न अधिक माना जाता है और 30 से अधिक होता है तो मोटापा कहा जाता है.

मोटापा बढ़ने के कारण?

चेन्नई में एक सरकारी मल्टी स्पेशियालिटी अस्पताल में डायटीशियन का काम करने वाली डॉक्टर मीनाक्षी बजाज इस अस्पताल की टेक्निकल बेरिएट्रिक कमिटी की भी सदस्य हैं. वो यहां आने वाले मरीज़ों को बेरिएट्रिक सर्जरी की जरूरत है या नहीं इसका फ़ैसला कमेटी के सदस्यों के साथ लेती हैं.

वो कहती हैं, ”उनके पास अधिक वज़न या मोटापे की समस्या को लेकर अगर पांच लोग आते हैं तो उसमें से चार महिलाएं होती हैं. NFHS डेटा में ये भी कहा गया है कि कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में जहां मुसलमान महिलाओं में रेड मीट, बीफ़, अंडा आदि का सेवन ज़्यादा होता है, वहीं मछली का सेवन कम है. हालांकि ये हिंदू या मुसलमान का मामला नहीं है, लेकिन डेटा यही कहता है.”

वो आगे बताती हैं कि ये एक पक्ष है. वहीं दूसरा ये है कि दक्षिण में कार्बोहाइड्रेट का सेवन भी ज़्यादा है. जहां शहरी क्षेत्रों में चावल ज़्यादा खाया जाता है जो कि पॉलिश्ड होता है, वहीं ग्रामीण इलाकों में रागी, बाजरे की अलग-अलग क़िस्में और चावल खाते हैं और वो पॉलिश्ड नहीं होते. वहीं आईसीएमआर का आंकड़ा भी ये कहता है कि दक्षिणी राज्यों में मीट, अंडा, मछली और सी फ़ूड का सेवन पूरे भारत से ज़्यादा है और ये भी एक बड़ा कारण है मोटापे का. वहीं फल, सब्ज़ी और फ़ाइबर का सेवन भी कम है.

NFHS के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर में से एक डॉक्टर सहारन पेडगांवकर का कहना है कि दक्षिणी राज्यों को डेमोग्राफिकली देखा जाए तो विकास और शहरीकरण ज्यादा हुआ है. जहां आने-जाने के लिए साधन उपलब्ध हैं वहां आपको दूर से पानी नहीं लाना होता. ऐसे में दिनचर्या में फिज़िकल ऐक्टीविटी कम हो जाती है. दूसरी बात ये कि वहां वेलफे़यर स्कीम में सभी को राशन उपलब्ध होता है जो महिलाओं के मोटापे का कारण बन रहा है.

वहीं 35 वर्ष या अधेड़ उम्र के बाद भी शरीर में मेटाबॉलिज़्म कम हो जाता है जो वज़न बढ़ने का एक कारक बनता है.

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर पॉपुलेशन साइंसेज़ में प्रोफ़ेसर एस के सिंह का कहना है कि अर्बन या शहरी क्षेत्रों में महिलाओं में मोटापा बढ़ रहा है और इसमें खानपान और लाइफ़ स्टाइल एक बड़ी भूमिका अदा कर रहा है.

उनके अनुसार, ”हमने शोध में पाया है कि पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड्स का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ गया है जिसमें शुगर और साल्ट की सैचुरेटेड मात्रा ज्यादा होती है. इन चीज़ों का चलन ज्यादा बढ़ गया है. हमारे डेटा के अनुसार, पिछले दस सालों में पैकेज्ड और प्रोसेसेड फूड्स पर प्रति व्यक्ति जीडीपी ख़र्च दस गुना बढ़ गया है. अब लोग बाहर जाकर या टेकअवे से खाना पसंद कर रहे हैं जिससे दक्षिण ही नहीं उत्तर भारत भी अछूता नहीं है.”

प्रोफ़ेसर एस के सिंह और डॉक्टर सहारन पेडगांवकर दोनों का ही कहना है कि दक्षिण भारत में जहां चावल की ज़्यादा खपत होती है, वहीं उत्तर भारत में गेंहू, मसालेदार खाना और तेल ज्यादा इस्तेमाल होता है. हाल के वर्षों में ये भी देखा गया है कि महिलाओं में शराब का सेवन भी बढ़ा है.

मुंबई में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर पॉपुलेशन साइंसेज़ या आईआईपीएस में सीनियर रिसर्च फ़ेलो नंदलाल इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि इसका एक कारण डेमोग्राफिक ट्रांजीशन बताते हैं. उनके अनुसार जहां बढ़ती आयु के साथ ओवरवेट और ओबीस आबादी की हिस्सेदारी बढ़ती जाती है. उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत की आबादी में व्यस्कों और बुजुर्गों का प्रतिशत अधिक है जो इस अंतर का एक और कारण हो सकता है.”

स्वास्थ्य पर असर 

दिल्ली की क्लॉउड 9 में काम कर रही स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रतिभा सिंघल कहती हैं कि महिलाओं में पीसीओडी(PCOD) की समस्याएं आ रही हैं. पीसीओडी में महिला के शरीर में मौजूद हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं जिसकी वजह से ओवरी में मल्टीपल सिस्ट हो जाते हैं, जिसकी वजह से भी मोटापा बढ़ सकता है और वज़न कम करना ख़ासा मुश्किल हो जाता है. दिल्ली और दक्षिण भारत की महिलाओं में वज़न बढ़ने का मुख्य कारण ये हो सकता है.

वे आगे कहती हैं कि युवा लड़कियों में 65 से 70 किलोग्राम वज़न होना अब सामान्य सी बात है.

उनके अनुसार, ”मेरे पास कई युवा लड़कियां आती है जिनकी उम्र 30 साल की होती है जो प्रेग्नेंसी प्लैन कर रही होती हैं या या प्रेग्नेंट होती हैं तो उनका वज़न 85 पार होता है. हम देख रहे हैं कि युवा लड़कियों में मोटापा बढ़ रहा है और इसका मुख्य कारण छोटी उम्र से जंक फ़ूड का सेवन है.”

वे कहती हैं, ”इसके अलावा कामकाजी महिलाएं ज्यादातर बैठकर काम कर रही होती हैं और घर के काम के लिए भी किसी सर्वेंट की मदद लेती हैं, वहीं समय के अभाव में वे वॉकिंग या व्यायाम भी नहीं कर पाती हैं क्योंकि वो घर और ऑफिस की ज़िम्मेदारी निभा रही होती हैं. इस बीच जंक फूड और बाहर का खाना, ये सब मिलाकर महिलाओं में मोटापे का एक बड़ा कारण बनता है.”

डॉक्टर प्रतिभा के अनुसार मोटापा कई बीमारियों को भी जन्म देता है. मोटापे की वजह से शारीरिक और मानसिक कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. मोटापे के कारण चलते या सीढ़ियां चढ़ते वक्त सांस फूलने लगती है.

मोटापे से होने वाली बीमारियां

उच्चरक्त चाप
डायबिटीज़
दिल की बीमारियां – हार्ट अटैक और हार्ट स्ट्रोक
कोलेस्ट्रॉल
बांझपन
कैंसर

वहीं कसरत कम करने या जोड़ों पर ज्यादा वज़न पड़ने से ऑस्टियोपोरोसिस या हड्डियों की बीमारी और आर्थराइटिस या गठिया के रोग का ख़तरा बढ़ जाता है.
मोटापा कम करने के लिए डॉक्टर लाइफ़स्टाइल में बदलाव करने की सलाह देते हैं. उनके अनुसार नियमित समय पर खाने, खान-पान में हरी सब्जियों और फल के सेवन और जंक फूड को डाइट से हटाने से फ़ायदा होता है.

-एजेंसी

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