आगरा। सहकार भारती ने आगरा मंडल के अपने तीन दिवसीय सघन प्रवास के जरिए संगठन के भीतर बड़ी सर्जरी की तैयारी कर ली है। मथुरा, आगरा और फिरोजाबाद में आयोजित बैठकों के दौर में जहाँ जमीनी मजबूती पर मंथन हुआ, वहीं काम में ढिलाई बरतने वाले पदाधिकारियों पर सख्ती का खाका भी तैयार किया गया। संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए अब निष्क्रिय चेहरों की जगह नई ऊर्जावान टीम को जिम्मेदारी सौंपने की रणनीति बनाई गई है।
तीन जिलों में मंथन और अनुशासन का पाठ
सहकार भारती के इस महत्वपूर्ण प्रवास में प्रदेश संगठन प्रमुख कर्मवीर सिंह, प्रदेश प्रशिक्षण प्रमुख प्रो. वेद प्रकाश त्रिपाठी और विभाग संयोजक राकेश शुक्ला ने कमान संभाली। प्रवास का आगाज कान्हा की नगरी मथुरा से हुआ, जहाँ जिला और महानगर इकाइयों के साथ विस्तार की योजनाएं बनीं। दूसरे दिन ताजनगरी आगरा में बैठकों का दौर चला, जिसमें संगठन की मौजूदा चुनौतियों और भविष्य के लक्ष्यों पर बारीक चर्चा हुई। अंतिम चरण में फिरोजाबाद मंडल की बैठकों के साथ इस सांगठनिक अभियान का समापन किया गया।
परफॉरमेंस रिपोर्ट तैयार, जल्द गिर सकती है गाज
बैठकों के दौरान कार्यकारिणी के आपसी तालमेल और सक्रियता की समीक्षा की गई। संगठन को धार देने के लिए नए पदों के सृजन पर सहमति बनी है। सबसे अहम फैसला उन पदाधिकारियों को लेकर लिया गया जो लंबे समय से निष्क्रिय चल रहे थे; उनके दायित्वों में फेरबदल की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अन्य पदाधिकारियों को भी स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि शेष डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में उन्हें पूरी सक्रियता दिखानी होगी, अन्यथा सांगठनिक कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।
प्रदेश नेतृत्व को भेजी गई ‘सीक्रेट रिपोर्ट’
प्रवास के समापन के बाद प्रदेश संगठन प्रमुख और विभाग संयोजक ने पूरे मंडल की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है। यह रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री को भेज दी गई है। सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट के आधार पर आगरा मंडल में जल्द ही बड़े संगठनात्मक बदलाव और नई नियुक्तियां देखने को मिल सकती हैं।
सहकारिता विस्तार की नई दिशा
आगरा मंडल कार्यालय में मैनपुरी के पदाधिकारियों के साथ भी एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय हुई। सहकार भारती के पदाधिकारियों का मानना है कि आगरा मंडल सांगठनिक दृष्टि से रीढ़ की हड्डी है। आने वाले समय में यहाँ कई बड़े और प्रभावी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जो क्षेत्र में सहकारिता के आंदोलन को नई गति और दिशा प्रदान करेंगे।


