लखनऊ: उत्तर प्रदेश में रविवार को हुए योगी मंत्रिमंडल के विस्तार पर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सधी हुई लेकिन तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रियों की संख्या बढ़ाना सरकार का आंतरिक मामला हो सकता है, लेकिन इसका असली फायदा प्रदेश के गरीबों, महिलाओं और युवाओं को मिलना चाहिए। गौरतलब है कि रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार में छह नए मंत्रियों को शामिल किया गया है और दो मंत्रियों का कद बढ़ाते हुए उन्हें प्रमोट किया गया है।
”राजनीतिक जुगाड़” बनाम “जनहित”
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) के जरिए अपनी राय रखते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में फेरबदल करना सत्ताधारी दल का राजनीतिक चिंतन हो सकता है, जिस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में लिखा कि यदि इस विस्तार का सकारात्मक प्रभाव सर्वसमाज के गरीबों, मजदूरों, किसानों और युवाओं के जीवन पर नहीं दिखा, तो लोग इसे महज एक “राजनीतिक जुगाड़” और सरकारी संसाधनों पर बढ़ा हुआ बोझ ही मानेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला सुरक्षा और सम्मान में सुधार दिखना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
कानून-व्यवस्था और असुरक्षा पर सवाल
बसपा सुप्रीमो ने केवल मंत्रिमंडल तक ही सीमित न रहकर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने राजधानी लखनऊ में भाजपा के एक युवा ब्राह्मण नेता पर हुए जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है। मायावती के अनुसार, उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज खुद को न केवल उपेक्षित महसूस कर रहा है, बल्कि वह असुरक्षित भी है, जो कि बेहद चिंता का विषय है।
बसपा शासन की याद दिलाई
अपनी प्रतिक्रिया के अंत में मायावती ने अपनी पूर्ववर्ती सरकारों के कामकाज की तुलना वर्तमान स्थिति से की। उन्होंने दावा किया कि बसपा के शासनकाल में ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति के तहत समाज के हर वर्ग, विशेषकर ब्राह्मण समाज को न्याय और सुरक्षा की गारंटी दी गई थी। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और सरकार की पहली जिम्मेदारी कमजोर तबकों के जान-माल और मजहब की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जो वर्तमान में परिलक्षित होना जरूरी है।

