मथुरा: 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर ‘समर्थ’ योजना का आगाज, 30 महिलाओं को मिलेगा निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण

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मथुरा। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय, बुनकर सेवा केंद्र मेरठ एवं दीनदयाल बुनकर केंद्र, गऊ ग्राम परखम के संयुक्त तत्वावधान में 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस-2026 के अवसर पर ‘समर्थ’ योजना के अंतर्गत 45 दिवसीय हथकरघा बुनाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ शनिवार को अशोक सिंघल हॉल, गऊ ग्राम परखम में हुआ। कार्यक्रम में हथकरघा उद्योग के संरक्षण, संवर्धन एवं ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा हमारी सांस्कृतिक पहचान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पारंपरिक उद्योगों को नई ऊर्जा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। “समर्थ” योजना के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित महिलाओं को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा।

मुख्य वक्ता अखिल भारतीय गौसेवा के अजीत महापात्रा ने कहा कि भारत के गांवों की समृद्धि पारंपरिक कुटीर उद्योगों से जुड़ी हुई है। हथकरघा केवल रोजगार का माध्यम नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत भी है। यदि गांव की महिलाएं अपने घर से उत्पादन कर बाजार से जुड़ेंगी तो परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के राज्यमंत्री उपाध्यक्ष वीरेंद्र सेमवाल ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। आज आवश्यकता है कि पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता और विपणन से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम देशभर में बुनकरों के लिए नए अवसर पैदा करेंगे।

वस्त्र मंत्रालय के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपनिदेशक तपन शर्मा ने कहा कि विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय द्वारा संचालित योजनाओं का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को कौशल विकास से जोड़ना है। “समर्थ” योजना के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को तकनीकी दक्षता, उत्पादन क्षमता और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करने का आह्वान किया।

बुनकर प्रशिक्षण केंद्र के उपाध्यक्ष दीपक अग्रवाल ने बताया कि 45 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 30 महिलाओं को हथकरघा बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के मुख्य प्रशिक्षक मोदा राम (राजस्थान) हैं, जबकि सहायक प्रशिक्षक भभूता राम एवं महेंद्र प्रशिक्षण देंगे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी महिला को प्रशिक्षण अवधि में प्रतिदिन ₹300 का मानदेय दिया जाएगा।

प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद परीक्षा आयोजित होगी तथा सफल प्रतिभागियों को लगभग ₹30 हजार लागत का करघा उपलब्ध कराया जाएगा, जिस पर निर्धारित अनुदान का लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

मंत्री नितिन बहल ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 17 गांवों की महिलाएं भाग ले रही हैं। उनका उद्देश्य महिलाओं को तकनीकी दक्षता प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है, जिससे वे अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

मंत्री हरिशंकर शर्मा ने कहा कि परखम क्षेत्र के लगभग 52 गांवों में कभी हथकरघा बुनाई प्रत्येक घर की पहचान हुआ करती थी। समय के साथ लोग इस पारंपरिक व्यवसाय से दूर होते चले गए। संस्था का प्रयास है कि इस गौरवशाली परंपरा को पुनः जीवित किया जाए। उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रत्येक घर तक करघा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। महिलाओं को आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध कराया जाएगा और उनके द्वारा तैयार उत्पादों की मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी संस्था निभाएगी, ताकि उन्हें उनके श्रम का उचित मूल्य मिल सके।

कार्यक्रम में हथकरघा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, स्वरोजगार के अवसर, भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं “समर्थ” योजना की विस्तृत जानकारी भी प्रतिभागियों को दी गई और टूल किट प्रदान की गई।

प्रशिक्षणार्थियों ने इस पहल को ग्रामीण महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का संचालन अजय वर्मा ने किया। इस अवसर पर दीनदयाल धाम के निदेशक सोनपाल, राहुल गोयल, अर्पित महेश्वरी, उदित बंसल, शशिकांत, राम पाठक, किशन, अशोक, रामवीर फौजदार, महिपाल सिंह, पारस, राजदर्शन, राजेंद्र प्रधान, गोविन्द, हरिनारायण, हरेंद्र, गौरी, जगन प्रधान आदि उपस्थित रहे।