जम्मू और कश्मीर में मतदाता सूची के रिवीज़न से जुड़ी ख़बरों में ग़लत तथ्य दिए जाने पर राज्य सरकार ने आज जवाब दिया है.
सरकार ने उन ख़बरों को ग़लत बताया है कि राज्य की मतदाता सूची में 25 लाख से अधिक नए नाम जोड़े जाएंगे.
साथ ही बताया है कि मतदाता सूची में कश्मीरी प्रवासियों के नाम जोड़े जाने के विशेष प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जैसा कि पहले दावा किया गया था.
सरकार ने यह भी कहा है कि जम्मू और कश्मीर में संपत्ति ख़रीदने और नौकरी पाने के नियमों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है. दावा यह भी किया गया है कि इन नियमों का वोटरों के प्रतिनिधित्व से कोई जुड़ाव नहीं है.
राज्य के सूचना और जनसंपर्क निदेशालय ने शनिवार को ‘मतदाता सूची के रिवीज़न’ से जुड़े विभिन्न प्रावधानों की सच्चाई बताने वाले एक ट्वीट को रिट्वीट करके ये जानकारियां दी हैं.
और क्या कहा सरकार ने?
सरकार ने साफ किया है कि मतदाता सूचियों के इस रिवीज़न में जम्मू और कश्मीर के मौजूदा निवासियों को ही शामिल किया जाएगा.
सरकार के अनुसार हक़ीक़त ये है कि वोटरों की संख्या में केवल उतनी ही वृद्धि होगी जितने कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के नाम इस सूची में जुड़ेंगे
-एजेंसी

