मुंबई (अनिल बेदाग़): देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ‘कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह’ के अवसर पर मर्क स्पेशालिटीज प्रा. लि. द्वारा समर्थित “लाइफस्टाइल एवं डाइजेस्टिव हेल्थ अवेयरनेस सर्वे” के नतीजे चौंकाने वाले हैं। इस राष्ट्रव्यापी सर्वे के अनुसार, मुंबईकर तेजी से बदलती जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण पाचन संबंधी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन गंभीर खतरों के प्रति जागरूकता का स्तर अभी भी बेहद कम है।
लक्षणों की पहचान में भारी चूक
मुंबई में किए गए विश्लेषण से पता चला है कि केवल 18.9% लोग ही मल में खून आने या मल त्याग की आदतों में बदलाव को कैंसर के प्रारंभिक संकेत के रूप में पहचान पाते हैं। सबसे डराने वाली बात यह है कि 85% से अधिक लोग किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय खुद ही दवा (Self-medication) लेना पसंद करते हैं, जो बीमारी को और घातक बना सकता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: नजरअंदाज न करें ये संकेत
कैंसर विशेषज्ञ डॉ. ज्योति बाजपेयी ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा, “कोलोरेक्टल कैंसर अक्सर छोटे पॉलिप्स से शुरू होता है। यदि समय रहते इनकी पहचान हो जाए, तो इलाज संभव है। मल में खून, लगातार पेट दर्द या अचानक वजन कम होना जैसे लक्षणों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।”
डॉ. मुबारकुन्निसा टोन्से ने भी इस बात पर जोर दिया कि मुंबई में लोग गंभीर लक्षणों को भी साधारण समझकर खुद दवाइयां लेते हैं, जिससे स्थिति काफी जटिल हो जाती है। वहीं, डॉ. दर्शित शाह ने चेतावनी दी कि प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन, व्यायाम की कमी और तंबाकू का सेवन इस कैंसर के मुख्य कारक हैं।
विशेषज्ञों का साफ मानना है कि समय पर स्क्रीनिंग, सही जीवनशैली और जागरूकता के जरिए ही कोलोरेक्टल कैंसर के इस बढ़ते ग्राफ को नीचे लाया जा सकता है।
नोट- ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है । किसी भी सलाह को मानने से पहले अपने चिकित्सक से सम्पर्क करें.

