नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ 1 व 2 का भव्य उद्घाटन किया। विक्रम संवत् 2082 की विजया एकादशी के शुभ अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में पीएम ने इसे भारत की विकास यात्रा का एक ऐतिहासिक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह विजया एकादशी संकल्पों की सिद्धि का दिन है, उसी तरह ‘सेवा तीर्थ’ विकसित भारत के लक्ष्य को सिद्ध करने का केंद्र बनेगा।
ब्रिटिश प्रतीकों से मुक्ति का संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से नीतियां बनीं, लेकिन वे इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य की मानसिकता और गुलामी की याद दिलाती थीं। पीएम ने जोर देकर कहा, “साउथ और नॉर्थ ब्लॉक ब्रिटिश हुकूमत की सोच लागू करने के लिए बने थे, लेकिन ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समर्पित हैं।
म्यूजियम बनेगा पुराना संसद भवन
पीएम मोदी ने पुराने भवनों के ऐतिहासिक महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि वहां की स्मृतियां देश का अटूट हिस्सा रहेंगी। इसीलिए सरकार ने पुराने भवनों को म्यूजियम (संग्रहालय) के रूप में देश को समर्पित करने का निर्णय लिया है।
नाम नहीं, सत्ता का मिजाज बदला
गुलामी की मानसिकता पर कड़ा प्रहार करते हुए पीएम ने कहा कि 2014 के बाद से देश ने अपनी पहचान बदलने का अभियान शुरू किया। नेशनल वॉर मेमोरियल से लेकर ‘लोक कल्याण मार्ग’ तक, ये केवल नाम परिवर्तन नहीं हैं, बल्कि सत्ता के मिजाज को ‘सेवा की भावना’ में बदलने का एक पवित्र प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब देश में गुलामी की मानसिकता के लिए कोई जगह नहीं है।

