आगरा। ताजनगरी के संजय प्लेस स्थित होटल पीएल पैलेस में रविवार को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की दिव्यता और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘विनियम भरतनाट्यम क्लासेस’ द्वारा आयोजित ‘धिति-2’ नृत्य संध्या में नृत्यांगना आंचल जैन और उनके शिष्यों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम की हर मुद्रा और पदचाप में देवताओं के प्रति समर्पण और भारतीय विरासत की गहराई साफ झलक रही थी।
दीप प्रज्ज्वलन और गणमान्य जनों की उपस्थिति
समारोह का शुभारंभ सुप्रसिद्ध गजल गायक सुधीर नारायण, खेलगांव की संस्थापक मीरा गुप्ता, स्पिक मैके के क्षेत्रीय समन्वयक दीपक प्रहलाद अग्रवाल और आगरा बैडमिंटन एसोसिएशन की अध्यक्ष बीना लवानिया ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने आधुनिक दौर में शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण और युवाओं को इससे जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
मंच पर भक्ति और कला का संगम
कार्यक्रम की सूत्रधार आंचल जैन के निर्देशन में उनकी शिष्यों गौरी, काम्या, वेदिका, जीविषा, समरिया, मानसी, तनिष्का और काव्या ने मंच संभाला। नन्हे और युवा कलाकारों ने ‘पुष्पांजलि’, ‘महा गणपति’, ‘स्वागतं कृष्णा’, ‘अयेगिरी नंदिनी’ और ‘श्री रामचंद्र’ जैसे कठिन प्रसंगों पर सधा हुआ नृत्य पेश किया। कार्यक्रम का चरमोत्कर्ष तब आया जब आंचल जैन ने स्वयं ‘शिव अष्टकम’ की अत्यंत प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जिसे देख पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।
साधना को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प
आंचल जैन ने अपनी कला यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने श्रीमती कल्पना मल्लिक एवं सौरव दास से दीक्षा ली है। उन्होंने कहा, “भरतनाट्यम केवल शारीरिक संचालन नहीं, बल्कि ईश्वर तक पहुँचने की एक साधना है। मेरा उद्देश्य इस विधा को उन लोगों तक पहुँचाना है जो अभी इससे अपरिचित हैं।”
जज्बे को सलाम: 70 की उम्र में भी प्रेरणा
कार्यक्रम के दौरान एक विशेष आकर्षण श्रीमती स्नेहलता गुप्ता का सम्मान रहा। 70 वर्ष की आयु में भी हस्तनिर्मित वस्तुएं बनाने के अपने जुनून को जीवित रखने वाली स्नेहलता जी को उनकी जिजीविषा के लिए सम्मानित किया गया।
भव्य आयोजन और अतिथि
वृंदा बंसल और उर्वी मित्तल के कुशल संचालन में हुए इस कार्यक्रम में प्रतिभा तालेगांवकर, रोशनी गिदवानी, सीए आशीष जैन, डॉ. अनुपम शर्मा, और डॉ. भारती बंसल सहित शहर के कई प्रबुद्ध चिकित्सक, सीए और इंजीनियर उपस्थित रहे। अंत में आंचल जैन ने सभी सहयोगियों और अभिभावकों का आभार व्यक्त किया।

