मुआवजा नहीं तो इस्तीफा दो… किरावली तहसील पर किसानों का हल्लाबोल, ओलावृष्टि के 10 दिन बाद भी राहत न मिलने पर फूटा गुस्सा

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किरावली (आगरा): उत्तर प्रदेश के किरावली क्षेत्र में बीते 3 अप्रैल को हुई कुदरत की मार (भारी बारिश और ओलावृष्टि) ने किसानों की कमर तोड़ दी है। फसलों के पूरी तरह बर्बाद होने के बावजूद 10 दिन बीत जाने पर भी मुआवजे की कोई सुगबुगाहट न होने से अन्नदाता का धैर्य जवाब दे गया। सोमवार को किसान कांग्रेस के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने किरावली तहसील का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की।

वादाखिलाफी पर भड़के किसान:

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मुकेश डागुर और कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामनाथ सिकरवार ने जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि के तुरंत बाद सांसद और विधायकों ने प्रभावित गांवों का दौरा कर ’72 घंटे’ में नुकसान का आकलन और मुआवजा दिलाने का दंभ भरा था, लेकिन आज 240 घंटे बीतने के बाद भी किसान खाली हाथ है।

​”मुआवजा दो या इस्तीफा दो” के लगे नारे:

हाथों में तख्तियां लेकर तहसील पहुंचे किसानों ने करीब दो घंटे तक मुख्य द्वार का घेराव किया। किसानों ने एक स्वर में मांग उठाई कि यदि जनप्रतिनिधि अपना वादा पूरा नहीं कर सकते, तो उन्हें अपने पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा 6 सूत्रीय ज्ञापन:

प्रदर्शन के बाद एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मुख्य रूप से ये मांगें शामिल रहीं:

ओलावृष्टि का तत्काल और उचित मुआवजा।
​फसलों पर MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी।
​किसानों की कर्जमाफी और सरकारी खरीद केंद्रों का विस्तार।
​स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक।

​आंदोलन की चेतावनी:

कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामनाथ सिकरवार ने कहा कि सरकार केवल कागजी वादों में उलझाकर किसानों के साथ छल कर रही है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर मुआवजे की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो इस आंदोलन को गांव-गांव तक फैलाया जाएगा और चक्का जाम जैसी स्थिति पैदा होगी।

​प्रमुख उपस्थिति:

प्रदर्शन में छितर इंदौलिया, राजू चाहर, लाला इंदौलिया, संतोष चाहर, जसवंत चाहर, भानु सोलंकी, रोहन सिंह प्रधान समेत सैकड़ों की संख्या में क्षेत्र के किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।