लखनऊ: अगर आपके इलाके में पीएनजी (PNG) की पाइपलाइन पहुँच चुकी है और आपने अभी तक कनेक्शन नहीं लिया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने ‘नेचुरल गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ लागू कर दिया है। इसके तहत अब घरेलू गैस सिलेंडर (LPG) के बजाय पाइप वाली गैस का इस्तेमाल अनिवार्य होने जा रहा है।
90 दिन का अल्टीमेटम: नोटिस के बाद कटेगा कनेक्शन
नए नियमों के अनुसार, जिन इलाकों में बुनियादी ढांचा तैयार है, वहां निवासियों को पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए नोटिस दिया जाएगा। सूचना मिलने के 90 दिनों के भीतर यदि कनेक्शन नहीं लिया गया, तो उस पते पर एलपीजी (LPG) सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह रोक दी जाएगी।
सोसाइटियों और विभागों के लिए ‘डेडलाइन’ तय
अक्सर हाउसिंग सोसाइटियों या सरकारी विभागों की वजह से पाइपलाइन का काम लटक जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा:
सोसाइटी/RWA: पाइपलाइन के लिए रास्ता मांगने पर सोसाइटी को 3 दिन के भीतर मंजूरी देनी होगी। देरी करने पर पूरी सोसाइटी की एलपीजी सप्लाई रोकी जा सकती है।
सरकारी विभाग: छोटे नेटवर्क के लिए 10 दिन और बड़ी लाइनों के लिए 60 दिन में क्लियरेंस देना अनिवार्य है। समय सीमा बीतने पर इसे ‘ऑटोमैटिक मंजूरी’ (Deemed Clearance) मान लिया जाएगा।
जमीन मालिकों को ‘डबल’ मुआवजे का ऑफर
निजी जमीन से पाइपलाइन गुजारने के लिए सरकार ने फिक्स फॉर्मूला बनाया है। मालिक को कमर्शियल सर्किल रेट का 30% मुआवजा मिलेगा। यदि मालिक आवेदन के 24 घंटे के भीतर मंजूरी दे देता है, तो उसे दोगुना यानी 60% मुआवजा दिया जाएगा।
किराएदारों के लिए क्या हैं नियम?
सरकार का यह नया नियम व्यक्ति पर नहीं, बल्कि ‘पते’ (Address) पर आधारित है।
किराएदार खुद कर सकते हैं आवेदन: रेंट एग्रीमेंट और मकान मालिक की NOC के जरिए किराएदार भी कनेक्शन ले सकते हैं।
मकान मालिक का इनकार: यदि मकान मालिक फिटिंग के लिए मना करता है, तब भी 90 दिन बाद उस पते पर सिलेंडर की सप्लाई बंद हो जाएगी।
घर बदलते समय: घर छोड़ते समय आप कनेक्शन सरेंडर कर सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस ले सकते हैं।
सुरक्षा और बचत का तर्क
सरकार ने यह आदेश ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत जारी किया है ताकि युद्ध जैसे संकट के समय भी रसोई गैस की कमी न हो। पीएनजी के आने से उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुकिंग और रिफिलिंग के झंझट से मुक्ति मिलेगी, हालांकि विकल्प सीमित होने से कुछ उपभोक्ताओं को असुविधा हो सकती है।

