लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लंबे समय से बना सस्पेंस अब खत्म होने की कगार पर है। सूत्रों के मुताबिक, आगामी 48 से 72 घंटों के भीतर प्रदेश में कैबिनेट विस्तार हो सकता है। दिल्ली में भाजपा के आलाकमान के साथ दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व बृजेश पाठक, और संगठन महामंत्री धर्मपाल की हुई मैराथन बैठकों के बाद नामों पर अंतिम सहमति बन चुकी है।
अखिलेश के ‘PDA’ की काट के लिए विशेष रणनीति
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा इस बार कैबिनेट विस्तार के जरिए ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के जवाब में अपना सामाजिक समीकरण दुरुस्त करने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों का कहना है कि नए मंत्रियों के चयन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है, ताकि विपक्षी गठबंधन के प्रभाव को कम किया जा सके।
इन दिग्गजों को मिल सकती है जिम्मेदारी
मंत्रिमंडल विस्तार में जिन संभावित नामों की चर्चा सबसे तेज है, उनमें भूपेंद्र चौधरी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, मनोज पांडे रायबरेली के कद्दावर ब्राह्मण नेता, पूजा पाल: प्रयागराज क्षेत्र की प्रभावशाली पिछड़ी जाति की नेता, अशोक कटारिया व राजेश्वर सिंह इनके अनुभव और छवि को सरकार में भुनाने की तैयारी है।
मंत्रियों के विभागों में कैंची चलना तय
इस बार केवल नए चेहरे ही शामिल नहीं होंगे, बल्कि मौजूदा मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के आधार पर उनके विभागों में भी बड़े फेरबदल की संभावना है। खबर है कि कई मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जबकि कुछ मंत्रियों के विभाग बदलकर उन्हें अधिक महत्वपूर्ण या नए दायित्व दिए जा सकते हैं।
अगले दो-तीन दिन अहम
मंगलवार को इस संबंध में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। दिल्ली में हुई शनिवार की बैठक के बाद से ही लखनऊ में हलचल तेज है। विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने बचे होने के कारण, भाजपा इसे एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ के रूप में देख रही है ताकि चुनावी मैदान में पूरी मजबूती और नए जोश के साथ उतरा जा सके।


