ट्रंप की नई बयानबाज़ी से फिर बढ़ा विवाद, नक्शे में कनाडा-ग्रीनलैंड को बताया अमेरिका का हिस्सा; डिएगो गार्सिया पर UK को घेरा

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वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों और फैसलों को लेकर सुर्खियों में हैं। मंगलवार को ट्रंप ने दिन की शुरुआत कई ऐसे कदमों से की, जिनसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ट्रंप ने एक नया नक्शा जारी किया, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को अमेरिकी हिस्से के तौर पर दिखाया गया है।

इसके साथ ही उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ हुई निजी बातचीत का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसे कूटनीतिक मर्यादा और निजता का उल्लंघन माना जा रहा है।

डिएगो गार्सिया पर UK पर बरसे ट्रंप

ट्रंप ने इसी दौरान हिंद महासागर स्थित रणनीतिक द्वीप डिएगो गार्सिया को लेकर यूनाइटेड किंगडम (UK) की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ब्रिटेन द्वारा इस द्वीप की संप्रभुता मॉरीशस को लौटाने की योजना को “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” बताया।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि, “हैरानी की बात है कि हमारा ‘शानदार’ नाटो सहयोगी यूनाइटेड किंगडम डिएगो गार्सिया द्वीप को मॉरीशस को देने की योजना बना रहा है, जबकि वहां एक महत्वपूर्ण अमेरिकी मिलिट्री बेस मौजूद है।” ट्रंप ने दावा किया कि “चीन और रूस ने इस कमजोरी को जरूर नोटिस किया होगा।”

ग्रीनलैंड को लेकर फिर दोहराया इरादा

डिएगो गार्सिया का उदाहरण देते हुए ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को हासिल करने की अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा कि UK का इतनी अहम जमीन छोड़ना “बहुत बड़ी बेवकूफी” है और यही वजह है कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है। उन्होंने डेनमार्क और यूरोपीय सहयोगियों से “सही कदम उठाने” की बात भी कही।

डिएगो गार्सिया कहां है और क्यों अहम है?

डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित एक रणनीतिक द्वीप है, जो पूर्वी अफ्रीका के तट से लगभग 3,200 किलोमीटर दूर है। यह द्वीप कई दशकों से अमेरिका और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य ठिकाने के रूप में उपयोग होता रहा है। इस बेस के जरिए अमेरिका को मिडिल ईस्ट से लेकर एशिया तक सैन्य अभियानों में अहम सुविधा मिलती है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने डिएगो गार्सिया समेत चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को लौटाने और अमेरिकी सैन्य बेस को लीज पर जारी रखने की डील की थी। हालांकि, ट्रंप अब इस फैसले के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं।

चीन को लेकर बढ़ी चिंता

रिपब्लिकन सांसदों ने भी आशंका जताई है कि डिएगो गार्सिया को लेकर बदलाव से चीन को अमेरिकी गतिविधियों पर नजर रखने का मौका मिल सकता है। ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती आर्थिक और सैन्य मौजूदगी को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ती जा रही है।

भारत के लिए भी अहम है डिएगो गार्सिया

हिंद महासागर में स्थित होने के कारण डिएगो गार्सिया भारत के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। यह भारत के दक्षिणी तट से करीब 1,800 किलोमीटर दूर है। यह द्वीप चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा है।

भारत ने 22 मई 2025 को UK और मॉरीशस के बीच हुई चागोस संधि पर औपचारिक हस्ताक्षर का स्वागत किया था और मॉरीशस के दावे का समर्थन करते हुए इसे क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा मामला माना है। भारत की भूमिका इस समझौते में अहम मानी गई थी, ताकि मॉरीशस को संप्रभुता मिलने के बाद भी अमेरिकी सैन्य बेस का संचालन प्रभावित न हो।

कूटनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

ट्रंप के नए नक्शे, मैक्रों से निजी बातचीत सार्वजनिक करने और डिएगो गार्सिया पर UK को घेरने जैसी घटनाओं ने एक बार फिर अमेरिका की विदेश नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में इन बयानों का असर अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ रिश्तों पर भी दिख सकता है।