आगरा: इनर रिंग रोड लैंड पार्सल (तृतीय चरण) की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर किसानों का असंतोष मंगलवार को एक बड़े आंदोलन के रूप में सामने आया। किसान नेता श्याम सिंह चाहर के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने एडीए (आगरा विकास प्राधिकरण) मुख्यालय को घेर लिया और करीब एक घंटे तक तालाबंदी कर कामकाज ठप कर दिया।
मुख्य मांगें और विवाद:
किसानों का आरोप है कि मुख्यमंत्री की स्पष्ट नीति के बावजूद एडीए अधिकारी उनकी अनदेखी कर रहे हैं। किसानों की दो टूक मांग है—या तो उनकी जमीन वापस की जाए या वर्तमान बाजार दर (लगभग 49,500 रुपये प्रति वर्ग मीटर) के अनुसार मुआवजा दिया जाए। किसान नेताओं का कहना है कि 16 साल बाद भी जमीन पर भौतिक कब्जा उन्हीं का है, जो अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया को ही संदेहास्पद बनाता है।
प्रशासनिक वार्ता और आश्वासन:
एडीए मुख्यालय से लेकर मंडलायुक्त कार्यालय तक चले इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किसानों की उच्चस्तरीय वार्ता हुई। बैठक में अपर आयुक्त (प्रशासन) राजेश कुमार, एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट और एडीए सचिव संजय सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद थे।
प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सात दिन का समय मांगा है और भरोसा दिलाया है कि भूमि वापसी या उचित मुआवजे के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। 9 जून 2026 को प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा।
किसानों की चेतावनी:
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 9 जून तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचकर अनशन करने को मजबूर होंगे। प्रदर्शन में शामिल लाखन सिंह त्यागी और सोमवीर यादव ने एडीए और एसएलओ (विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया।
धरने में कल्ला यादव, मुकेश पाठक, लक्ष्मी नारायण बघेल, नागेंद्र फौजी सहित सैकड़ों किसान मौजूद थे। सभी ने अधिग्रहण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब सबकी निगाहें 9 जून को होने वाले स्थलीय निरीक्षण और प्रशासनिक रिपोर्ट पर टिकी हैं।


