सपा के टिकट पर राज्यसभा जाएंगे धनराज नथवानी? जानिए कौन हैं अखिलेश के नए उम्मीदवार

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनावों (Rajya Sabha Elections) को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। समाजवादी पार्टी (SP) ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने दोनों आधिकारिक उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। पार्टी की तरफ से एक नाम समाजवादी पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय महासचिव और दिग्गज नेता प्रो. रामगोपाल यादव का है, जबकि दूसरे उम्मीदवार के रूप में देश के जाने-माने कॉरपोरेट लीडर धनराज परिमल नथवानी को मैदान में उतारा गया है।

दोनों ही प्रत्याशियों ने बुधवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की गरिमामयी मौजूदगी में अपना नामांकन पत्र विधिवत दाखिल कर दिया है। इस दौरान पार्टी कार्यालय और विधानसभा परिसर में सपा के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

प्रो. रामगोपाल यादव समाजवादी पार्टी के सबसे पुराने, भरोसेमंद और कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं, जो किसी भी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वहीं, दूसरे उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी की पहचान देश के एक प्रमुख कॉरपोरेट लीडर और प्रतिष्ठित खेल प्रशासक के रूप में है। वर्तमान में वह देश की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में ‘ग्रुप प्रेसिडेंट’ के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उन्हें उद्योग जगत के शीर्षस्थ अंबानी परिवार के बेहद करीबी सहयोगियों में शुमार किया जाता है।

धनराज नथवानी के पिता परिमल नथवानी भी देश के एक प्रसिद्ध उद्योगपति और वर्तमान समय में राज्यसभा सांसद हैं। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो धनराज ने लंदन के प्रतिष्ठित ‘रीजेंट बिजनेस स्कूल’ से इंटरनेशनल बिजनेस में स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री हासिल की है। व्यावसायिक व्यस्तताओं के अलावा उन्हें पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और फोटोग्राफी का गहरा शौक है। वह लंबे समय से गुजरात के जंगलों, विशेषकर ‘गिर के शेरों’ के संरक्षण से जुड़े विभिन्न अभियानों में भी काफी सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी निभाते रहे हैं।

​क्या है राज्यसभा सीट जीतने का पूरा गणित?

​उत्तर प्रदेश की कुल 10 खाली राज्यसभा सीटों के लिए आगामी 16 अक्टूबर को मतदान संपन्न होगा। इस चुनाव में प्रदेश विधानसभा के निर्वाचित सदस्य (विधायक) अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव के तय नियमों के अनुसार, एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए कुल 37 प्रथम वरीयता के मतों की आवश्यकता होती है।

​वर्तमान समय में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के पास अपने दम पर 95 विधायकों का मजबूत संख्या बल उपलब्ध है। हालांकि, इस संख्या में वे विधायक शामिल नहीं हैं जिन्होंने पिछले पिछले राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से हटकर भाजपा प्रत्याशी संजय सेठ के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी—जिनमें राकेश पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्य के नाम शामिल हैं। इनमें से पूजा पाल वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की अधिकृत पदाधिकारी बन चुकी हैं, इसलिए उनके दोबारा समाजवादी पार्टी के पक्ष में मतदान करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। इसके बावजूद, शेष तीन बागी विधायकों में से सपा खेमे को पूरी उम्मीद है कि उनमें से कम से कम दो विधायक इस बार के चुनाव में वापस अपनी पुरानी पार्टी के पाले में लौट सकते हैं।

इसके अलावा, सुभासपा के बागी विधायक जगदीश नारायण राय और मो. अब्बास अंसारी का समर्थन भी समाजवादी पार्टी को मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है। विधायक राय ने पिछले चुनाव में भी खुलकर समाजवादी पार्टी के पक्ष में मतदान किया था। सपा के रणनीतिकारों और गणितज्ञों का मानना है कि इस प्रकार उनके पास आसानी से 99 मतों का समर्थन जुट रहा है। हालांकि, पार्टी को अपने तीन प्रत्याशियों को पूरी तरह जिताने के लिए कुल 111 मतों की जरूरत है, जिसका मतलब यह है कि तीसरे उम्मीदवार की नैया पार लगाने के लिए उन्हें कम से कम 12 अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करना होगा।

​राजनीतिक सूत्रों के हवाले से यह बात भी सामने आ रही है कि आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट कटने की आशंका से डरे हुए कई सत्ताधारी भाजपा विधायक अंदरखाने समाजवादी पार्टी के संपर्क में लगातार बने हुए हैं। उन सभी विधायकों को सपा की तरफ से यह ऑफर दिया गया है कि यदि वे इस राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग कर उनका साथ देते हैं, तो आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के टिकट की पूरी गारंटी दी जाएगी। यही नहीं, यही समान प्रस्ताव पार्टी ने अपने उन बागी विधायकों के सामने भी रखा है।