सचिन पायलट कर सकतें हैं जल्दी ही बड़ा धमाल, राजस्थान कांग्रेस में सियासी गर्मी बढ़ी

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पायलट के साथ कितने विधायक, सबकी नजरें टिकीं

पायलट के कांग्रेस को छोड़ने और नई पार्टी बनाने के संभावित राजनीतिक घटनाक्रम को उत्सुकता से देखा जा रहा है। सबकी नजरें इसपर भी टिकी हैं कि पायलट के इस कदम में उनके कितने समर्थक विधायक कांग्रेस से अलग होते हैं। और यह भी देखने वाली बात होगी कि यह घटनाक्रम क्या गहलोत सरकार की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

2020 में भी पायलट ने गहलोत सरकार को संकट में डाला, लेकिन…

जुलाई 2020 में सचिन पायलट ने खुले तौर पर बगावत की थी। तब पायलट उप मुख्यमंत्री थे और उन्होंने सीएम का दावा किया था। पूर्व उपमुख्यमंत्री ने तब यानी 2020 कम से कम 30 विधायकों के समर्थन का दावा किया था। लंबी सियासी उठापटक के बाद मामला शांत हुआ। आखिरकार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चतुराई से अपनी सरकार को संकट से बचा लिया। उन्होंने पायलट के कई समर्थक विधायकों को पाला बदलने के लिए राजी कर लिया था।

केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद गहलोत ने फ्लोर टेस्ट भी पास कर लिया था। गहलोत सरकार को 200 सदस्यीय सदन में 125 विधायकों का समर्थन प्राप्त था और ध्वनि मत से जीत हासिल की थी।

2020 में खाली हाथ, चुनावी साल में फिर से प्रयास

2020 के राजनीतिक संकट के अंत में, पायलट को 19 विधायकों का समर्थन प्राप्त था। विद्रोह के चलते पायलट को उपमुख्यमंत्री पद और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष का पद गंवाना पड़ा था। हालांकि, अब चुनावी साल है। पायलट फिर से अपनी बात मनवाने को बैचेन हैं, लेकिन बार बार चिटि्ठयां लिखने के बाद भी पायलट को पार्टी आलाकमान ने पायलट को कोई तवज्जो नहीं दी। इस बीच पायलट ने 11 अप्रैल को वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान कथित भ्रष्टाचार और गहलोत की निष्क्रियता के खिलाफ एक दिन का अनशन भी किया था। उन्होंने यह भी मांग की कि आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी के खिलाफ जांच शुरू की जाए, जिन पर मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी सहित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।

अनशन के एक महीने बाद पायलट का धमाल!

जयपुर में अपनी ही सरकार और कांग्रेस संगठन की खिलाफत करते हुए पायलट ने जयपुर में अनशन किया। उसके बाद 5 दिन की पदयात्रा भी की। पार्टी आलाकमान तक पूरजोर तरीके से बात पहुंचाने के लिए अनशन के ए महीने बाद यानी 11 मई को, उन्होंने 125 किलोमीटर लंबी यात्रा की। इस दौरान राज्य में भ्रष्टाचार, पेपर लीक जैसे मुद्दे उठाए। गहलोत सरकार के सामने तीन मांगे रखी और उन्हें पूरा करने के लिए 15 दिन का अलटीमेटम भी दिया।

हालांकि उनकी चेतावनी के अनुसार राज्यवापी आंदोलन अल्टीमेटम पूरा होने के बाद भी शुरू नहीं हो सका। इससे पहले आलकमान ने दिल्ली में सुलह वाली बैठक बुलाई। अब 11 जून को सुलह वाली बैठक के बाद का राजनीतिक घटनाक्रम होने जा रहा है। बताया जा रहा है पायलट इस दिन बड़ा धमाल करने वाले हैं।

Compiled: up18 News