आगरा। ताजनगरी के खंदारी स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का स्वामी विवेकानंद परिसर बुधवार की शाम सुरों की एक मखमली महफिल का गवाह बना। अवसर था भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा आयोजित ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ प्रदर्शनी-सह-व्यापार मेले का, जहाँ सांस्कृतिक संध्या में प्रख्यात गायक देशदीप शर्मा की मखमली आवाज ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया।
ग़ज़ल की पहली तान और तालियों की गूंज
जैसे ही देशदीप शर्मा मंच पर आए, उन्होंने मशहूर ग़ज़ल— “खामोश लब हैं, झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फत नई-नई है… तुम्हारी दौलत नई-नई है…” के साथ महफिल का आगाज़ किया। इस ग़ज़ल के हर शेर और हर गिरह पर पंडाल में मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। उनकी भावपूर्ण गायकी ने खचाखच भरे पंडाल में एक सम्मोहक वातावरण पैदा कर दिया।
सूफियाना रंग में डूबी महफिल
ग़ज़लों के दौर के बाद महफिल ने रूहानी मोड़ लिया। देशदीप ने जब अमीर खुसरो का कालजयी कलाम “छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाय के…” सूफियाना अंदाज़ में पेश किया, तो पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। श्रोता अपनी जगहों पर बैठकर झूमते नजर आए और सूफी संगीत के जादू ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस दो दिवसीय मेले में आए उद्यमियों, लाभार्थियों और विशिष्ट अतिथियों ने गायक की कला की मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यक्रम के समापन पर दर्शकों ने खड़े होकर कलाकार का अभिवादन किया।

