नई दिल्ली/मुंबई, मार्च 2026: राजधानी दिल्ली एक बार फिर वैश्विक सिनेमा के केंद्र के रूप में चमकने के लिए तैयार है। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल दिल्ली (आईएफएफडी) 2026 का आयोजन 25 से 31 मार्च तक होने जा रहा है। इस वर्ष फेस्टिवल को दुनिया भर से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है, जहाँ 100 से अधिक देशों से कुल 2,187 फिल्में प्राप्त हुई हैं। इनमें 1,372 अंतरराष्ट्रीय और 815 भारतीय फीचर व नॉन-फीचर फिल्में शामिल हैं।
भारत मंडपम बनेगा मुख्य केंद्र
प्रगति मैदान स्थित भव्य भारत मंडपम इस सात दिवसीय उत्सव का मुख्य केंद्र होगा। इसके साथ ही दिल्ली के विभिन्न मल्टीप्लेक्स और सार्वजनिक स्थानों पर भी फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी, ताकि आम जनता भी विश्वस्तरीय सिनेमा का आनंद ले सके।
सिनेमा का संतुलित संगम: 40-30-30 का फॉर्मूला
दिल्ली को एक बड़े सांस्कृतिक हब के रूप में स्थापित करने के लिए फेस्टिवल की प्रोग्रामिंग बेहद खास रखी गई है:
40% हिंदी सिनेमा: बॉलीवुड की चमक और कहानियाँ।
30% इंटरनेशनल फिल्में: वैश्विक सिनेमा के नए ट्रेंड्स।
30% क्षेत्रीय सिनेमा: भारत की भाषाई विविधता और मिट्टी की महक।
इसके अलावा देशभक्ति, आध्यात्मिक और बच्चों के लिए विशेष श्रेणियों की फिल्में भी प्रदर्शित की जाएंगी।
शर्मिला टैगोर को ‘लाइफटाइम’ सम्मान
इस वर्ष का सबसे खास आकर्षण दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर का सम्मान होगा। भारतीय और बांग्ला सिनेमा में दशकों तक अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली शर्मिला टैगोर को आईएफएफडी 2026 में उनके अविश्वसनीय योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।
शर्मिला टैगोर ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा ”फिल्म फेस्टिवल ऐसे मंच होते हैं जहाँ दुनिया भर का सिनेमा एक छत के नीचे आता है। आईएफएफडी का हिस्सा बनकर मुझे बेहद खुशी है। मैं अलग-अलग कहानियों और आवाजों का जश्न मनाने के लिए उत्साहित हूँ।”
क्यों खास है यह सम्मान?
हिंदी और बांग्ला सिनेमा की प्रतिष्ठित हस्ती शर्मिला टैगोर ने सत्यजीत रे से लेकर बॉलीवुड के दिग्गज फिल्मकारों के साथ काम किया है। उनकी गरिमा, अभिनय क्षमता और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस ने पीढ़ियों के कलाकारों को प्रेरित किया है। आईएफएफडी में उन्हें दिया जाने वाला यह सम्मान उनके उस गहरे प्रभाव की पहचान है, जो आज भी भारतीय फिल्म इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है।

