श्रीनगर/बरेली। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और 49 वर्षीय वरिष्ठ टीवी पत्रकार निधि राजदान के हालिया विवाह को लेकर देश में एक नया विवाद और बहस छिड़ गई है। गत 30 अक्टूबर 2026 को संपन्न हुए इस अंतरधार्मिक विवाह को लेकर जहां एक तरफ सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इस शादी के खिलाफ एक औपचारिक फतवा जारी कर दिया गया है। फतवे में इस विवाह को इस्लामी शरीयत और धार्मिक नियमों के खिलाफ करार दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘ऑल इंडिया मुस्लिम जमात’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पत्रकार निधि राजदान के विवाह को इस्लामी दृष्टिकोण से पूरी तरह गैर-कानूनी (नाजायज) घोषित किया है। अपने बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने रविवार को कहा कि इस्लाम में निकाह (विवाह) के कुछ स्पष्ट और तय कायदे-कानून हैं, जिनमें मुस्लिम पुरुष और गैर-मुस्लिम महिला के विवाह को लेकर कड़े नियम निर्धारित हैं।
मौलाना का तर्क: ‘धर्म परिवर्तन के बिना निकाह जायज नहीं’
मौलाना रजवी ने फतवा जारी करते हुए कहा कि उमर अब्दुल्ला मुस्लिम धर्म से आते हैं, जबकि निधि राजदान गैर-मुस्लिम हैं। ऐसे में इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार यह विवाह जायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला को विवाह से पूर्व निधि राजदान का इस्लाम धर्म में परिवर्तन कराना चाहिए था। यदि धर्म परिवर्तन के उपरांत निकाह की प्रक्रिया पूरी की जाती, तो ही यह विवाह इस्लामी नियमों के तहत वैध माना जाता। उनके अनुसार, इन स्थापित नियमों की अनदेखी करके किया गया यह विवाह शरीयत की कसौटी पर अमान्य है।
विशेष विवाह अधिनियम के तहत संपन्न हुआ था विवाह
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान का विवाह भारत के नागरिक कानून ‘विशेष विवाह अधिनियम’ (Special Marriage Act) के तहत संपन्न हुआ था। इस निजी समारोह में दोनों पक्षों के पारिवारिक सदस्य और बेहद करीबी रिश्तेदार ही सम्मिलित हुए थे। निधि राजदान मूल रूप से कश्मीरी पंडित समुदाय से संबंध रखती हैं और उनका पैतृक निवास जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में है।
जहां एक वर्ग इस शादी को दो व्यक्तियों का निजी मामला बता रहा है, वहीं मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के फतवे और बयानों ने इस व्यक्तिगत निर्णय को एक बड़े सामाजिक और धार्मिक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है।

