रोना तब जब गुरु गलत निकले…शंकराचार्य के सामने रोने लगी महिला श्रद्धालु, महाराज बोले- हम सरकारों की जी-हुजूरी नहीं कर सकते

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वाराणसी: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे यौन शोषण के आरोपों के बाद उनके अनुयायियों में भारी रोष और भावुकता देखी जा रही है। सोमवार को काशी के विद्या मठ में एक महिला श्रद्धालु शंकराचार्य के सामने ही फूट-फूटकर रोने लगी। भक्तों की इस पीड़ा को देख शंकराचार्य ने उन्हें ढांढस बंधाया और सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा कटाक्ष किया।

​”गुरु गलत निकले तब रोना, षड्यंत्र पर नहीं”

जब महिला रोने लगी, तो शंकराचार्य ने बहुत ही शांत स्वर में कहा “रोना तब आता है, जब आपका गुरु गलत निकल जाए। किसी के षड्यंत्र पर रोने की कोई जरूरत नहीं है। सरकारों को आज ‘जी-हुजूर’ कहने वाले शंकराचार्य चाहिए, जो वही बोलें और वही करें जो सरकार चाहे। लेकिन हम ‘जी-हुजूर’ करने वाले शंकराचार्य नहीं बन पा रहे हैं।”

​श्रद्धालु का दावा: “ये मठ नहीं, हमारा घर है”

शंकराचार्य का आशीर्वाद लेने पहुँची नीलम दुबे नामक महिला ने बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से इस मठ और ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज से जुड़ा है। उन्होंने कहा “हम राजति पुरोहित काशी के वंशज हैं। हमारे परिवार ने आज तक मठ के बारे में ऐसी घृणित बात नहीं सुनी। महाराज जी पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं।”

उन्होंने दावा किया कि महाराज जी गोरक्षा की बात को पूरी दुनिया में फैला रहे हैं, इसलिए उनकी आवाज को दबाने के लिए यह घृणित आरोप लगाया गया है।

सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि यह हमला केवल उन पर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा करने वाली चारों पीठों पर है। उन्होंने कहा ​”सरकार चाहती है कि वह खुद ही ‘धर्मचारी’ भी हो और ‘सरकार’ भी। चारों शंकराचार्य सनातन की रक्षा करते आए हैं, इसलिए अब उन पर प्रहार शुरू हो गया है। जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह सब किया जा रहा है, लेकिन गौ-हत्या बंदी की आवाज़ और बुलंद होगी।”

धार्मिक आंदोलन जारी रहेगा

​शंकराचार्य ने अंत में दोहराया कि ‘गौ माता’ की रक्षा का आंदोलन चारों पीठों के शंकराचार्यों के नेतृत्व में जारी रहेगा। उन्होंने अपने भक्तों से अपील की कि वे सच्चाई पर विश्वास रखें, क्योंकि सत्य कभी समाप्त नहीं होता।