अयोध्या: रामनगरी अयोध्या आज एक ऐसी दैवीय घटना की साक्षी बनी, जिसने पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामनवमी के पावन अवसर पर ठीक दोपहर 12 बजे, सूर्य की रश्मियों ने भगवान श्री रामलला के ललाट का अभिषेक किया। लगभग 4 मिनट तक नीली और स्वर्णिम किरणों का यह ‘सूर्य तिलक’ प्रभु के मुखमंडल पर दमकता रहा। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरा अवसर है जब विज्ञान और भक्ति के इस अनूठे संगम को करोड़ों श्रद्धालुओं ने लाइव प्रसारण के जरिए देखा।
वैज्ञानिकों का चमत्कार: 19 वर्षों तक नहीं बदलेगी सटीक गणना
इस अलौकिक दृश्य को साकार करने का श्रेय बेंगलुरु के वैज्ञानिकों को जाता है। उन्होंने विशेष ऑप्टो-मैकेनिकल उपकरणों का निर्माण किया है, जो सूर्य की गति का गहन अध्ययन कर तैयार किए गए हैं।
मंदिर के ऊपरी हिस्से से टकराकर सूर्य की किरणें दर्पणों और लेंस के जरिए परावर्तित (Reflect) होकर सीधे गर्भगृह में प्रभु के मस्तक तक पहुँचीं। इन उपकरणों की डिजाइन ऐसी है कि अगले 19 सालों तक सूर्य की बदलती गति के बावजूद तिलक की सटीकता बनी रहेगी।
पीएम मोदी ने टैबलेट पर किए लाइव दर्शन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस ऐतिहासिक क्षण के लाइव दर्शन किए। पीएमओ द्वारा साझा की गई एक तस्वीर में प्रधानमंत्री हवाई यात्रा के दौरान टैबलेट पर सूर्य तिलक के अनुष्ठान को एकाग्रता से देखते नजर आए। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक चेतना का एक गौरवशाली क्षण बताया।
“जहाँ राम हैं, वहीं राह है”: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर भावुक संदेश देते हुए कहा ”सूर्यवंश शिरोमणि प्रभु रामलला के भाल पर विराजित यह स्वर्णिम सूर्य तिलक आस्था, आत्मगौरव और अध्यात्म का आलोक है। यह विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्पों को दिशा दे रहा है, क्योंकि जहाँ राम हैं, वहीं राह है।”
श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम
रामनवमी पर उमड़े जनसैलाब को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट ने दर्शन की अवधि में विस्तार किया है सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। सूर्य तिलक के विशेष समय (दोपहर 12 बजे) के दौरान गरिमा बनाए रखने के लिए वीआईपी प्रवेश पर अस्थायी रोक रही।
जन्मोत्सव के अवसर पर प्रभु को पीले रंग के भव्य वस्त्र पहनाए गए और गर्भगृह में 14 विशेष पुजारियों ने अनुष्ठान संपन्न कराया।
यह सूर्य तिलक केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की वैज्ञानिक प्रगति और सनातन संस्कृति की शाश्वत चेतना का मिलन बिंदु बनकर उभरा है।

