लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी तरह सख्त हो गए हैं। रविवार को ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि बिजली व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
‘सिर्फ शिकायत दर्ज न करें, समाधान बताएं’
सीएम योगी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि बिजली आपूर्ति में कोई बाधा आती है, तो उपभोक्ताओं को केवल शिकायत दर्ज कराने तक सीमित न रखें। उन्होंने कहा, “उपभोक्ताओं को यह भी बताया जाए कि समस्या कब तक ठीक होगी। सही समय पर सही जानकारी देने से लोगों का भरोसा बढ़ता है।” इसके साथ ही, उन्होंने बिलिंग और वसूली व्यवस्था में सुधार के भी निर्देश दिए।
त्वरित समाधान के लिए रिस्पॉन्स सिस्टम
आंधी-तूफान और भीषण गर्मी जैसी चुनौतियों का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि फील्ड स्तर पर ‘त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम’ सक्रिय रहना चाहिए। ट्रांसफार्मर खराब होने या फीडर बाधित होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त एक्शन तय है।
स्मार्ट मीटर और भविष्य की ऊर्जा योजना
स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर सीएम ने कहा कि इसे लोगों के लिए और अधिक आसान और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “बिजली केवल तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह किसानों की सिंचाई, आम लोगों के जीवन, व्यापार और उद्योगों के लिए जीवन रेखा है।” मुख्यमंत्री ने भविष्य की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लंबी अवधि की ऊर्जा योजनाओं पर काम करने और ट्रांसमिशन नेटवर्क को आधुनिक बनाने पर जोर दिया।
ऊर्जा मंत्री और राज्य मंत्री को फील्ड में उतरने के निर्देश
बैठक में मौजूद ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वे खुद हेल्पलाइन कॉल सेंटर और फील्ड में जाकर व्यवस्था का निरीक्षण करें। सीएम ने दोहराया कि गर्मी के मौसम में प्रदेशवासियों को पर्याप्त बिजली देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अफसरों ने सीएम को क्या बताया…
अफसरों ने बताया- इस साल अप्रैल-मई में पिछले साल की तुलना में ज्यादा गर्मी पड़ी। प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ी।
15 अप्रैल से 22 मई के बीच रोजाना औसत बिजली खपत 501 मिलियन यूनिट से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट हो गई।
अधिकतम मांग 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट पहुंच गई। 20, 21 और 22 मई को यूपी देश में दूसरा सबसे ज्यादा बिजली खपत वाला राज्य रहा।
15 मई के बाद अलग-अलग कारणों से कुछ पावर प्लांटों में बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ। फिर भी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने 12 राज्यों के साथ पावर बैंकिंग कर बिजली की व्यवस्था बनाए रखी।
2015 से 2026 के बीच प्रदेश ने 32,305 मेगावाट बिजली क्षमता के लिए समझौते किए हैं, जिनमें से 62 प्रतिशत क्षमता पिछले तीन साल में जोड़ी गई है।
नवंबर 2025 से नई 1912 कॉल सेंटर सेवा शुरू की गई है, जो लखनऊ और नोएडा से संचालित हो रही है। इससे रोजाना कॉल संभालने की क्षमता 75 हजार से बढ़ाकर 90 हजार कर दी गई है। अब तक प्रदेश में 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
सरकार के निर्देश पर सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर को फिर से पोस्टपेड सिस्टम में बदल दिया गया है।
जून 2026 से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को हर महीने 1 से 10 तारीख के बीच बिल जारी किया जाएगा।
बिल एसएमएस, वॉट्सऐप और ई-मेल से भी भेजे जाएंगे। साथ ही 15 मई से 30 जून तक पूरे प्रदेश में विशेष कैंप लगाकर स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों का समाधान किया जा रहा है।
अफसरों ने बताया- बीते कुछ साल में ट्रांसफॉर्मर खराब होने के मामलों में बड़ी कमी आई है। 2022-23 में जहां 429 पावर ट्रांसफॉर्मर खराब हुए थे। 2025–26 में यह संख्या घटकर सिर्फ 87 रह गई है। इसी तरह 100 केवीए से ज्यादा क्षमता वाले बड़े वितरण ट्रांसफॉर्मरों के खराब होने के मामले भी काफी कम हुए हैं।
2022-23 में 39,177 बड़े ट्रांसफॉर्मर खराब हुए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 20,292 हो गई। बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, समय पर मरम्मत और जिम्मेदारी तय होने से यह सुधार हुआ है।


