गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में पधारे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने राम मंदिर दान चोरी मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि एसआईटी (SIT) बना दी गई है और कहा था कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि फिर जब वे दोबारा अयोध्या आए, तो उनके मन में यह डर हो गया कि लोग पूछेंगे कि जांच का क्या हुआ? इसलिए 27 साल पुरानी घटना को दूसरा रूप देकर सामने रखा गया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि आप भी ध्यान भटकाने में उनकी मदद कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि बताइए, दूध का दूध और पानी का पानी कहां है? स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मामले की जांच और उसके परिणामों को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग की है।
हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज के दावे को बताया “सरासर झूठ”
उल्लेखनीय है कि सीएम योगी ने आरोप लगाया था कि पूर्ववर्ती सपा सरकार के दौरान हनुमानगढ़ी मंदिर की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने की कोशिश की गई थी। अयोध्या में एक जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष (सपा-कांग्रेस) पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया था कि जिन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए, उन्होंने ही हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का पाप किया था।
इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज़ होने का दावा “सरासर झूठ” है और सरकार इसे सिद्ध करे, अन्यथा झूठ बोलने वालों को गद्दी छोड़ देनी चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर कभी नमाज नहीं हुई और सीएम ने ऐसे बयान देकर अयोध्या का अपमान किया है।
योगी आदित्यनाथ के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग का ऐलान
शंकराचार्य ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वे हनुमानगढ़ी के महंतों से अनुरोध करेंगे कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमानगढ़ी में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दें। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो वे स्वयं हनुमानगढ़ी में दर्शन करना छोड़ देंगे। शंकराचार्य के इस आक्रामक तेवर से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए विवाद के संकेत मिल रहे हैं।


