आगरा: ताजनगरी में मानसून की पहली मूसलाधार बारिश ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी के तहत कराए जाने वाले विकास कार्यों की जमीनी हकीकत और दावों की पोल खोलकर रख दी है। दयालबाग क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जयरामबाग मुख्य मार्ग पर सड़क का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे सड़क के ठीक बीचों-बीच एक गहरा और खतरनाक गड्ढा बन गया है।
इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों और राहगीरों में भारी चिंता और आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि इतने व्यस्त मार्ग पर सड़क का इस तरह अचानक बैठ जाना किसी भी दिन एक बड़े और गंभीर सड़क हादसे को न्योता दे सकता है।
2014 में डाली गई सीवर लाइन की गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, जयरामबाग मुख्य मार्ग पर जिस स्थान पर यह सड़क धंसी है, वहां ठीक नीचे वर्ष 2014 में सीवर लाइन बिछाई गई थी। सड़क के धंसने के बाद अब उस दौरान अपनाई गई कार्यप्रणाली, निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्रीय जनता का सीधा आरोप है कि जब सीवर लाइन डाली जा रही थी, तब निर्धारित तकनीकी मानकों का बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया था, और उसी लापरवाही का परिणाम है कि आज सड़क इस प्रकार बीच से बैठ गई है।
वर्तमान में लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी में नमी काफी बढ़ गई है, जिससे जमीन और अधिक कमजोर हो रही है। यदि इस गड्ढे और टूटी हुई सड़क की समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई, तो यह और भी गंभीर रूप ले सकता है। खासकर रात के अंधेरे में वाहन चालकों को यह गहरा गड्ढा दिखाई न देने के कारण किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।
स्मार्ट सिटी के दावों की खुली पोल
आगरा को एक आधुनिक ‘स्मार्ट सिटी’ के रूप में विकसित करने और संवारने के लिए पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये के विकास कार्य धरातल पर उतारे गए हैं। शहर में सड़कों, सीवर नेटवर्क और जल निकासी की व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा किए जाते रहे हैं। लेकिन जैसे ही बरसात का मौसम आता है, जगह-जगह सड़कें धंसने और भारी जलभराव की समस्याएं सामने आने लगती हैं, जो इन तमाम दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं।
जयरामबाग में हुई सड़क धंसने की इस घटना ने पुराने सीवर कार्यों की गुणवत्ता के साथ-साथ सड़क निर्माण के बाद उसकी नियमित देखरेख और निगरानी व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि यदि सीवर लाइन बिछाने के बाद मिट्टी की भराई और सड़क की री-कार्पेटिंग तय मानकों के अनुरूप की गई होती, तो इस तरह मानसून के दौरान सड़क धंसने जैसी स्थिति कभी पैदा नहीं होती।
तकनीकी जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
घटना से आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से यह मांग की है कि इस पूरे मामले की फौरन तकनीकी जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि यह पड़ताल होनी चाहिए कि वर्ष 2014 में सीवर लाइन डालते वक्त किन लोगों की देखरेख में काम हुआ था और सड़क की बहाली में किस स्तर की लापरवाही बरती गई थी।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि तुरंत मौके पर विशेषज्ञों की एक टीम भेजी जाए, जो सड़क के नीचे की स्थिति और सीवर पाइपलाइन की हालत की जांच कर सके। यदि जांच के दौरान निर्माण कार्य में कोई भी भ्रष्टाचार या मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो संलिप्त अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल, इस सड़क धंसने की घटना ने एक बार फिर आगरा में बरसात से पहले होने वाले कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित महकमा इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और इस मुख्य मार्ग को युद्धस्तर पर दुरुस्त करवाकर कब तक सुरक्षित बनाता है।


